अस्पताल में महिला डॉक्टर की कमी, सौपेंगे िरपोर्ट

Published at :23 Nov 2017 7:46 AM (IST)
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अस्पताल में महिला डॉक्टर की कमी, सौपेंगे िरपोर्ट

सभी वार्डो की अधिकारियों ने की जांच सीतामढ़ी : राज्य डाटा ऑपरेटर अरविंद कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दल ने बुधवार को सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. जिसमें प्रसव वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी भवन, सर्जिकल वार्ड समेत अन्य तमाम वार्डों का बारी-बारी से जांच की गयी. जांच के दौरान उन्होंने […]

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सभी वार्डो की अधिकारियों ने

की जांच
सीतामढ़ी : राज्य डाटा ऑपरेटर अरविंद कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दल ने बुधवार को सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. जिसमें प्रसव वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी भवन, सर्जिकल वार्ड समेत अन्य तमाम वार्डों का बारी-बारी से जांच की गयी.
जांच के दौरान उन्होंने प्रसव वार्ड में क्षमता से अधिक प्रसव होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि गायनिक महिला चिकित्सक की कमी है. जिसके कारण पूरे महीने मात्र 10% लोगों को ही इसका फायदा मिल पाता है. क्योंकि इस वार्ड में उनकी ड्यूटी ऑन कॉल है. वह भी प्रत्येक दिन नहीं है. सदर अस्पताल में मात्र एक ही गायनिक महिला चिकित्सक है.
कहा कि चिकित्सक की भरती ज्यादा से ज्यादा हो इसके लिए राज्य सरकार द्वारा एक लाख के महीना पर चिकित्सक की बहाली की व्यवस्था की है. बावजूद इसके चिकित्सक की कमी सभी जगह है. हर सदर अस्पताल में 42 संसाधन की व्यवस्था रखने के लिए मंत्रालय द्वारा गाइडलाइन दिया गया है. उसी को लेकर पूरे राज्य में पांच अलग-अलग टीम बनायी गयी है, जो जांच कर अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज देंगे. दो सदस्यीय दल में श्री कुमार के अलावा मो इम्तियाजुद्दीन शामिल थे. मौके पर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ शकील अंजुम, प्रबंधक विजय चंद्र झा, जिला अनुश्रवण व मूल्यांकन पदाधिकारी प्रभात कुमार समेत कई कर्मी मौजूद थे.
बेसिन की हालत देख जांच दल ने जतायी नाराजगी
सदर अस्पताल के निरीक्षण को आये दो सदस्यीय जांच दल के सामने सदर अस्पताल की कुव्यवस्था सामने आयी. डाटा ऑपरेटर अरविंद कुमार के नेतृत्व में दल जब प्रसव वार्ड में पहुंचा तो बेसिन की हालत देखकर भौचक रह गया. बेसिन में गंदगी की अंबार था तथा उसकी हालत बद से बदतर दिख रही थी. शौचालय बाहर रहने के कारण प्रसव पीड़ा से पीड़ित मरीजों की कठिनाइयां सामने आयी. इमरजेंसी वार्ड समेत कई स्वास्थ्य कार्यालय में कर्मी की कमी व चपरासी स्तर के कर्मी द्वारा सूई-दवा देने की बात पर कहा कि दो-तीन महीना के अंदर स्वास्थ्य कर्मी की कमी खत्म हो जायेगी. इसके लिए बहाली की प्रक्रिया शुरू किया गया है.
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