सील तोड़ चला रहे थे क्लिनिक

Published at :15 Nov 2017 4:10 AM (IST)
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सील तोड़ चला रहे थे क्लिनिक

कार्रवाई. अस्पताल रोड स्थित डॉ नीलमणि के अस्पताल में िफर छापेमारी शिकायत मिलने के बाद पुलिस पहुंची अस्पताल कर्मियों से की पूछताछ सीतामढ़ी : प्रशासन द्वारा सील करने के बावजूद अवैध रूप से नर्सिंग होम के संचालन की मिली शिकायत के बाद एसडीओ सदर के आदेश पर पुलिस-प्रशासन की टीम ने मंगलवार को शहर के […]

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कार्रवाई. अस्पताल रोड स्थित डॉ नीलमणि के अस्पताल में िफर छापेमारी

शिकायत मिलने के बाद पुलिस पहुंची अस्पताल
कर्मियों से की पूछताछ
सीतामढ़ी : प्रशासन द्वारा सील करने के बावजूद अवैध रूप से नर्सिंग होम के संचालन की मिली शिकायत के बाद एसडीओ सदर के आदेश पर पुलिस-प्रशासन की टीम ने मंगलवार को शहर के अस्पताल रोड स्थित डाॅ नीलमणी व डाॅ नीलम रानी के क्लिनिक में छापेमारी की. वहीं मौजूद मरीज व कर्मियों से पूछताछ की. इस दौरान चिकित्सक के भाई मिट्ठू ने इस क्लिनिक को डॉ बीरेंद्र कुमार सिंह का क्लिनिक बताया.
वहीं इंस्पेक्टर अनिल कुमार शर्मा से मोबाइल पर बात भी करायी. जहां डॉ बीरेंद्र सिंह ने उक्त क्लिनिक के उनका होने से इंकार कर दिया. जबकि कंपाउंडर के पास डॉ बीरेंद्र कुमार सिंह द्वारा जारी एक पत्र मिला.
जिसमें उन्होंने इस क्लिनिक के खुद के होने की बात लिखी है. टीम ने उक्त पत्र को जब्त कर लिया. टीम में कार्यपालक पदाधिकारी श्री सिन्हा व नगर थानाध्यक्ष श्री शर्मा के अलावा अवर निरीक्षक अशोक कुमार, प्रमोद कुमार व सशस्त्र बल शामिल थे. टीम में शामिल कार्यपालक दंडाधिकारी शीलानाथ सिन्हा ने बताया की मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.
बताया कि जिस जमीन पर यह क्लिनिक चल है उस पर विवाद है. जमीन की मालकीन राजकली देवी द्वारा आवेदन दिया गया था. जबकि 21 अक्तूबर को इलाज के क्रम में बच्चे की हुई मौत के बाद सदर अस्पताल के सामने स्थित डॉ नीलमणि के क्वींसलैंड हॉस्पीटल प्राइवेट लिमिटेड (वैष्णवी शिशु केयर) नामक क्लिनिक में परिजनों ने हंगामा किया था. बताया की उस क्लिनिक को कई बार सील किया गया है. बावजूद इसके सील तोड़ चिकित्सक क्लिनिक चला रहा है.
क्या है मामला : जिले में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से चल रहे नर्सिंग होम के खिलाफ साल 2015 से प्रशासनिक कार्रवाई जारी है. इस क्रम में प्रशासनिक टीम ने शहर के तमाम चिकित्सकों को नोटिस देकर चिकित्सकीय व नर्सिंग होम से संबंधित प्रमाण पत्र के साथ तलब किया था. उक्त कागजात एसडीओ सदर कार्यालय में जमा करना था. क्वींसलैंड हास्पीटल एंड रिसर्च इंस्टीच्यूट प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी के बाद डॉ नीलमणी ने मूल कागजात के बदले प्रमाण पत्र की छाया प्रति एसडीओ सदर को उपलब्ध कराया था.
वहीं बताया था कि मूल प्रमाण पत्र खो गया है. प्रमाण पत्र खोने को लेकर डॉ नीलमणी ने थाने में सनहा भी दर्ज कराया था. हालांकि जांच में पाया गया कि डॉ नीलमणी दूसरे चिकित्सक के प्रमाण पत्र पर नर्सिंग होम चला रहा है. पुलिस मामले की जांच में लगी ही थी कि डॉ नीलमणी ने प्रशासन का ध्यान भटकाने के लिये खुद से रंगदारी मांगे जाने की की झूठी साजिश रच डाली. हालांकि मामले का खुलासा होने के बाद रंगदारी की साजिश रचने की प्राथमिकी डॉ नीलमणी व अन्य के खिलाफ दर्ज करायी गयी.
इसके बाद लंबे समय तक नीलमणी फरार रहे. इधर, मामले के अनुसंधानक अवर निरीक्षक सुमन मिश्रा की जांच में पाया गया गया कि डॉ नीलमणी का असली नाम नीरज कुमार है. उसके पिता का नाम अरूण कुमार सिंह है. जो शिक्षक के पद पर तैनात है. जबकी वह मूल रूप से शिवहर जिले के श्यामपुर भटहा थाना के लालगढ़ योगिया का रहने वाला है. वहीं डॉ नीलमणी ने अपना निबंधन संख्या 37879 बताया है. जबकि यह निबंधन मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना के बाजितपुर कोदरिया निवासी शत्रुध्न राय के पुत्र डॉ नीलमणी का है. जिसने वर्ष 2007 में पीएमसीएच से एमबीबीएस की थी.
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