सूर्योपासना का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Oct 2017 1:21 AM (IST)
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नहाय खाय आज. बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी को उमड़ी लोगों की भीड़, छठ घाटों की सफाई तेज सीतामढ़ी : सूर्योंपासना का सबसे बड़ा त्योहार चार दिवसीय छठ महाव्रत का शुभारंभ नहाय-खाय के साथ मंगलवार से शुरू हो रहा है. यह महाव्रत साल में दो बार आता है. पहला चैत्र मास के षष्ठी तिथि […]
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नहाय खाय आज. बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी को उमड़ी लोगों की भीड़, छठ घाटों की सफाई तेज
सीतामढ़ी : सूर्योंपासना का सबसे बड़ा त्योहार चार दिवसीय छठ महाव्रत का शुभारंभ नहाय-खाय के साथ मंगलवार से शुरू हो रहा है. यह महाव्रत साल में दो बार आता है. पहला चैत्र मास के षष्ठी तिथि को तथा दूसरा कार्तिक मास के शुक्ल षष्ठी तिथि को.
नहाय-खाय से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी तिथि को पारण के साथ इस महापर्व का समापन होता है. हिंदू सनातन धर्म का शायद यह पहला महापर्व है, जिसमें जात-पात, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब आदि का भेद नहीं होता. हर कोई एक घाट पर एक साथ इस महापर्व को आस्था पूर्वक मनाते हैं. खास बात यह कि यह इकलौता महापर्व है, जिसमें वेद मंत्रोच्चार के लिए पंडितों की आवश्यकता नहीं होती. इस महापर्व में भगवान सूर्य और उनकी छोटी बहन छठी मइया की उपासना की जाती है.
सुबह चार से 12 बजे तक हजारों श्रद्धालु करेंगे हवन : सीतामढ़ी. शहर के लक्ष्मणा नदी तट पर स्थापित जिले के इकलौते सूर्य मंदिर में छठ के अवसर पर हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु हवन कर अपने परिवार की सुख-शांति व स्वस्थ्य काया के लिए सूर्यदेव से कामना करेंगे.
मंदिर को स्थापित करने वाले महंत मंगल दास ने बताया कि छठ व्रत के अंतिम अर्घ्य के दिन सुबह चार बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक मंदिर में हजारों श्रद्धालु हवन करने के लिए जुटेंगे. मान्यता है कि इस असवर पर हवन करने से सभी तरह के मनोवांछित फलों की प्राप्ती होती है और घर में खुशहाली लौटती है. बता दें कि महंत मंगल दास सूबे के आरा जिला के रहनेवाले हैं. वह वर्ष 1972 में सीतामढ़ी व्यवसाय के लिए आए थे. बचपन में उन्हें एक सिक्का मिला था,
जिसपर भगवान भास्कर का चित्र अंकित था. उसे देखने के बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों न प्रत्यक्ष देवता सूर्य मंदिर की स्थापना की जाए. उन्होंने सबसे पहले आरा प्राइवेट बस स्टैंड के पास एक नहर के तट पर सूर्यदेव की मंदिर की स्थापना की.
बाद में भिक्षाटन कर स्थानीय सत्यनारायण ठाकुर, वीरेंद्र पूर्वे, बिंदुनंदन झा व बिहार रेडियो हाउस के सहयोग से वर्ष 1984 में लक्ष्मणा नगर स्थित लखनदेई नदी तट पर भगवान भास्कर की प्रतिमा स्थापित कर हवन कार्य का प्रारंभ किया. मंदिर में छठी मइया, माता अंजना एवं बाल हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित है. महंत मंगल दास ने बताया कि आने वाले समय में मंदिर में शिव एवं मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित करने की योजना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक ही मंदिर में भगवान भास्कर, छठी माता, अंजना माता, बाल हनुमान, शिव एवं आदि शक्ति दुर्गा की पूजा-अर्चना करने को मिल सके.
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