जयकारे के साथ खुला पट नवरात्र. सुबह से मां को देेखने के इंतजार में थी भीड़

Published at :28 Sep 2017 5:04 AM (IST)
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जयकारे के साथ खुला पट नवरात्र. सुबह से मां को देेखने के इंतजार में थी भीड़

सीतामढ़ी : शारदीय नवरात्र के सातवें दिन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों की ओर से स्थापित मां दुर्गा की जयकारे के साथ पट खोला गया. साथ ही मां के कालरात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गयी. मां की आंखें खुलने के इंतजार में सुबह से ही पूजा मंडपों में श्रद्धालुओं की भीड़ […]

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सीतामढ़ी : शारदीय नवरात्र के सातवें दिन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों की ओर से स्थापित मां दुर्गा की जयकारे के साथ पट खोला गया. साथ ही मां के कालरात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गयी.

मां की आंखें खुलने के इंतजार में सुबह से ही पूजा मंडपों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी. इसी क्रम में जिला मुख्यालय, डुमरा स्थित कैलाशपुरी मोहल्ला में स्थापित मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की जयकारे के साथ पट खोला गया. इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने दुर्गे माता की जय, शेरो वाली माता की जय व जय दुर्गे-जय दुर्गे समेत अन्य नारे लगा रहे थे. पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी था.
1990 से होती है पूजा : पूजा समिति के अध्यक्ष पांडेय अंजनी प्रसाद वर्मा ने बताया कि यहां वर्ष 1990 से प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा होती है. प्रथम वर्ष चंदा के रूप में मात्र आठ हजार वसूली की गयी थी, जिसमें से भी कुछ राशि शेष बच गया था. धीरे-धीरे समय के साथ महंगाई बढ़ती गयी व खर्च भी बढ़ता गया. बताया इस वर्ष का बजट करीब दो लाख रुपया है, जबकि यहां कोई खास बाहरी आडंबर नहीं होता है. आचार्य शिवशंकर झा मात्र एक रुपया दक्षिणा लेकर पूजा कराते हैं. पूजा समिति के सदस्य पूरे मनोयोग से मां की आराधना करते है और मां की कृपा से सब कुछ पूरा हो जाता है.
चंदा वसूलने नहीं जाते हैं सदस्य
सचिव निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2005 से अध्यक्ष के रूप में रहे स्व हरिकिशोर सिंह के नेतृत्व में मुहल्लावासियों के घर जा कर चंदा उगाही करने की प्रथा को बंद कर दिया गया. उनके द्वारा यह एनाउंस कराया गया कि जिन मुहल्लावासियों को चंदा देना है, वे अपनी स्वेच्छा से पूजा स्थल पर आ कर चंदा जमा करा सकते हैं. तब से यही प्रथा कायम है. राशि कम पड़ने पर जो पूजा समिति के जो स्थायी सदस्य हैं, वे अपने निजी कोष से खर्च का वहन करते है.
एक रुपया दक्षिणा लेते हैं आचार्य : महंगाई के इस युग में बिना लोभ-लालच के कोई आचार्य 10 दिनों तक विधिवत पूजा कराये यह आश्चर्य की बात है, पर ऐसा करते हैं आचार्य शिवशंकर झा. करीब 10 वर्षों से वे मां की प्रेरणा व स्वेच्छा से एक रुपये दक्षिणा लेकर पूजा कराते आ रहे हैं . एवं आगे भी कराते रहेंगे. मौके पर पुजारी सुधांशु शेखर, कृष्णमुरारी श्रीवास्तव, पप्पू श्रीवास्तव, प्रिंस कुमार, कोषाध्यक्ष गोपाल कुमार समेत दर्जनों श्रद्धालु मौजूद थे.
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