शेखपुरा का 33वां स्थापना दिवस आज, जानें इन 7 महान हस्तियों को जिन्होंने रचा जिले का गौरवशाली इतिहास

शेखपुरा का स्थापना दिवस(सांकेतिक तस्वीर)
Sheikhpura Foundation Day : 31 जुलाई 1994 को बिहार के शेखपुरा को जिला का दर्जा मिला. इस अवसर पर, हम जिले के उन 5 महान हस्तियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने अपने कार्यों से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया.
Sheikhpura Foundation Day : शेखपुरा पहले मुंगेर जिला का हिस्सा था. 31 जुलाई 1994 को शेखपुरा को जिला का दर्जा मिला. 33वें स्थापना दिवस को जिलेवासी धूमधाम से मनाने में लगे हैं. शेखपुरा जिला बिहार के कई प्रमुख हस्तियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है. आइए जाने शेखपुरा के उन महान हस्तियों के बारे में-
01. डॉ श्रीकृष्ण सिंह

बिहार के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और प्रथम मुख्यमंत्री रहे डॉ श्री कृष्ण सिंह का पैतृक गांव शेखपुरा जिला अंतर्गत बरबीघा बाजार के समीप माउर गांव हैं. जो वर्तमान में बरबीघा नगर परिषद क्षेत्र में है. 21 अक्टूबर 1887 को जन्में श्रीकृष्ण सिंह ने प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव से शुरू की हाईस्कूल की पढ़ाई मुंगेर जिला स्कूल से और पटना विश्वविद्यालय से कानून (लॉ) की डिग्री ली. श्री कृष्ण सिंह अपनी युवा अवस्था में वकालत की प्रैक्टिस छोड़कर महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन और अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इन्होंने 8 साल जेल में बिताए. अपने कार्यों से पूरे बिहार में अमिट छाप छोड़ी. वह बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री रहते हुए शिक्षा,उद्योग और सिंचाई के लिए बहुत काम कराया. देवघर के वैद्यनाथ धाम में दलितों और पिछड़ों के प्रवेश का ऐतिहासिक नेतृत्व किया. वे 1946 से 1961 तक देश की आजदी के पहले और बाद में लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे.
02.लाला बाबू सिंह

बरबीघा के तेउस गांव में लाला बाबू सिंह जन्म 15 अगस्त 1898 को हुआ था. वह बड़े जमींदार परिवार से थे. अपने युवा अवस्था में वह स्वतंत्रता आन्दोलन से प्रभावित होकर 1920 के असहयोग आंदोलन से जुड़े. 1930 में नामक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. वह जमींदारों के जुल्म के खिलाफ किसानों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई. यह पंडित यदूनंदन शर्मा के साथ बिहार किसान सभा में काम करते थे. अंग्रेजों के खिलाफ आन्दोलन के कारण करी बार जेल गए. भागलपुर और हजारीबाग में सजा काटी. देश की आजादी के बाद समाज सेवा और शिक्षा के काम में लगे रहे. बरबीघा क्षेत्र में स्कूल और पुस्तकालय की स्थापना में मदद की. वे 1952 में बरबीघा सीट से पहले विधायक बने. बाद में कुछ बर्षों के लिए राज्यसभा के सांसद भी रहे.
03.राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

शेखपुरा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कर्मभूमि रही है. वह शेखपुरा के सब रजिस्टार कार्यालय में 1932 से 1934 तक क्लर्क के रूप में कार्यरत रहे. यह कार्यालय वर्तमान कटरा बाजार सब्जी मार्केट में संचालित था.जिसका अब नामोंनिशान मिट चूका है. इसके बाद वह बरबीघा हाईस्कूल में हेडमास्टर के रूप में 1934 से 1947 तक कार्यरत रहे. दो साल रजिस्ट्री कार्यालय और 13 साल स्कूल में कुल 15 साल शेखपुरा जिले की भूमि में व्यतीत करने वाले रामधारी सिंह दिनकर शिक्षा देने के साथ छात्रों को राष्ट्रभक्ति की भी शिक्षा देते थे. अपने लेखन से एक कवि के रूप में चर्चित हुए. उनकी रचना हुंकार 1938 में प्रकाशित हुई.इसी संग्रह ने उन्हें विद्रोही कवि और युग कवि बना दिया. ब्रिटिश सरकार ने इस किताब की जब्त कर लिया था. “कुरुक्षेत्र” 1946 में प्रकाशित हुई. 1959 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान मिला.1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार “उर्वशी” के लिए मिला.
04.राजो सिंह

शेखपुरा के निर्माता के रूप में राजो सिंह का नाम आम लोगों के बीच चर्चित है. शेखपुरा सदर प्रखंड के हथियावां गांव में इनका जन्म 25 मार्च 1928 को हुआ था. यह राजनीति में 50 साल से ज्यादा सक्रिय रहे.यह शेखपुरा के सबसे कद्दावर नेता माने जाते थे.1954 में पहली बार मुखिया बने.1972 में पहलीबार बरबीघा से बिहार केसरी डॉ श्री कृष्ण सिंह के बेटे शिवशंकर सिंह को हराकर निर्दलीय विधायक बने.1977 से 2000 तक लगातार विधायक रहे. शेखपुरा से पांच बार और बरबीघा से एक बार विधायक निर्वाचित हुए.1998 और 1999 में बेगुसराय से लोकसभा सदस्य बने.
5. बद्रीनारायण लाल

वर्तमान अरियरी प्रखंड के रामपुर गांव में अत्यंत साधारण परिवार में जन्में बद्रीनारायण लाल शेखपुरा के डीएम हाई स्कूल के शिक्षक रहे. कम्युनिस्ट पार्टी की पत्रिका पढ़ने के कारण स्कूल प्रबंधन से टकराव के कारण शिक्षक का कार्य छोड़ना पड़ा. इसके बाद वह पूरी तरह से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से पूरी तरह से जुड गए. बाद में वह दो बार विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए. शेखपुरा के गिरिहिंडा पहाड़ पर सड़क निर्माण,पानी और बिजली का प्रबंध के साथ ही शेखपुरा टाउन हॉल का निर्माण,अरघौती पोखर के सौंदर्यीकरण में उनका अहम योगदान रहा. वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नौ बर्षो तक बिहार राज्य के सचिव भी रहे.
6. लोकनाथ आजाद

मुंगेर जिला अंतर्गत आने वाले शेखपुरा विधानसभा सीट का नेतृत्व करने वाले दलित नेता लोकनाथ आजाद वर्तमान निकटवर्ती लखीसराय जिला में पड़ने वाले सिसमा गांव के निवासी थे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दलित चेहरे के रूप में जाने जानेवाले आजाद 1972 में शेखपुरा विधानसभा का नेतृत्व किया था.
07.महावीर चौधरी

वर्तमान बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी के पिता महावीर चौधरी का बरबीघा राजनीतिक कर्मभूमि रहा है. यहां से महावीर चौधरी 1980,1985,1990 और 1995 लगातार चुनाव जीते. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के टिकट पर वह चुनाव जीतते रहे हैं.
शेखपुरा की पहचान सिर्फ एक जिला नहीं, प्रेरणा की भूमि
शेखपुरा का इतिहास केवल प्रशासनिक पहचान तक सीमित नहीं है. यह जिला स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य, किसान आंदोलन, समाज सेवा और लोकतांत्रिक राजनीति की समृद्ध विरासत का साक्षी रहा है. स्थापना दिवस के अवसर पर इन महान विभूतियों को याद करना जिले की गौरवशाली परंपरा को सम्मान देने जैसा है.
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