12 महीने काम, 10 महीने का मानदेय, तीन माह से वेतन नहीं मिलने से रसोइयों में आक्रोश; अब धरने की तैयारी

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बैठक में शामिल स्कूली रसोइया

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बिहार के अरियरी प्रखंड में रसोइयों को पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है. इस आर्थिक तंगी के बीच, उन्होंने 28 सितंबर को बीआरसी पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया है. एनजीओ के माध्यम से मध्याह्न भोजन देने की योजना का भी विरोध किया जा रहा है.

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School Cook Union: बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ अरियरी की बैठक एक्टू नेता कमलेश प्रसाद और माले नेता राजेश कुमार राय की उपस्थिति में हुई. अध्यक्षता रसोइया नेत्री सबूजा देवी ने की. बैठक में अरियरी प्रखंड के विभिन्न स्कूलों से दर्जनों रसोइयों ने भाग लिया. इसमें अरविंद सिंह, विभा देवी, पूनम देवी, कमली देवी, ममता देवी, विमली देवी और सीमा देवी समेत अन्य रसोइया शामिल थीं. बैठक में आगामी 28 सितंबर को अरियरी बीआरसी पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया.

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तीन महीने से मानदेय नहीं मिलने का आरोप

बैठक को संबोधित करते हुए एक्टू नेता कमलेश प्रसाद ने कहा कि जिले के रसोइयों को पिछले तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है. दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे पर्व सामने हैं. ऐसे में रसोइया परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति है. उन्होंने जिले भर के रसोइयों से आगामी 6 अक्टूबर को बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ एक्टू के बैनर तले मुख्यमंत्री के समक्ष होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पटना चलने की अपील की.

एनजीओ के माध्यम से मध्याह्न भोजन देने पर जताया विरोध

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन योजना का निजीकरण कर 29 जिलों के 11 हजार स्कूलों में एनजीओ के माध्यम से खाना दिया जा रहा है. इसमें पटना के बाढ़, मोकामा, बख्तियारपुर, फतुहा, मनेर, विक्रम और पूर्वी चंपारण के अलावा शेखपुरा टाउन एवं चेवाड़ा प्रखंड के स्कूल भी शामिल हैं.

वक्ताओं ने कहा कि रसोइयों का काम बढ़ता जा रहा है, लेकिन विद्यालयों में उन्हें सम्मान नहीं मिलता. पहले 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति की व्यवस्था थी, लेकिन अब उससे पहले ही जबरन हटाये जाने की बात कही जा रही है. एनजीओ का विस्तार लगातार होने से रसोइयों की छंटनी की प्रक्रिया तेज होने का आरोप लगाया गया.

12 महीने काम, मानदेय 10 महीने का

रसोइया संघ के नेताओं ने कहा कि नौ घंटे विद्यालय में काम कराने के बावजूद केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है, जो उचित नहीं है. रसोइयों को स्वास्थ्य सुरक्षा और रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं मिलता. इसके अलावा ड्रेस, ईपीएफ और ईएसआई का लाभ भी नहीं मिलने की बात कही गयी.

वक्ताओं ने कहा कि अपने हक और अधिकार के लिए जिले के रसोइये चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने सभी रसोइयों से 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के समक्ष होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पटना पहुंचने की अपील की.

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