Sasaram News : अनुकंपा बहाली की काउंसेलिंग के अंतिम दिन तक रिक्त पदों की संख्या पता नहीं

Published by : PRABHANJAY KUMAR Updated At : 31 Jul 2025 9:43 PM

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शिक्षा विभाग में लिपिक व परिचारी के पदों के लिए काउंसेलिंग के दूसरे दिन गुरुवार तक लिपिक पद के लिए 154 और परिचारी पद के लिए 13 अभ्यर्थी शामिल हुए.

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सासाराम ऑफिस़ शिक्षा विभाग में लिपिक व परिचारी के पदों के लिए काउंसेलिंग के दूसरे दिन गुरुवार तक लिपिक पद के लिए 154 और परिचारी पद के लिए 13 अभ्यर्थी शामिल हुए. शुक्रवार को छूटे अभ्यर्थियों की काउंसेलिंग होगी. विभागीय सूचना के अनुसार लिपिक पद के लिए 218 लोगों ने आवेदन दिया था, जबकि परिचारी पद के लिए 22 लोगों ने आवेदन दिया था. शायद यह पहली बहाली है, जिसके रिक्त पदों की जानकारी ना विभाग को है और ना अभ्यर्थियों को. बस काउंसेलिंग कराने की लाइन लगी रही. जबकि, किसी बहाली के पहले रिक्त पदों को सार्वजनिक करने की परंपरा रही है. बावजूद इसके समाचार लिखे जाने तक काउंसेलिंग चालू रही और रिक्त पदों की संख्या लापता. यह हाल जिला शिक्षा विभाग का है, जहां बिहार राज्य स्कूल लिपिक व परिचारी नियमावली 2025 के तहत मृत शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है. लेकिन, जिस ढंग से जिला शिक्षा विभाग बहाली की प्रक्रिया को अंजाम दे रहा है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. ज्ञातव्य हो कि अनुकंपा के आधार पर बहाली के लिए फाइनल मेधा सूची में जारी 218 लिपिक और 22 परिचारी की सूची निकाल, उन्हें काउंसेलिंग के लिए बुलाया गया. पर, उन्हें यह नहीं बताया गया कि लिपिक के कितने पद और परिचारी के कितने पदों पर बहाली होगी. नाम नहीं छापने की शर्त पर काउंसेलिंग के लिए पहुंचे एक अभ्यर्थी ने बताया कि हम लोगों को सीट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गयी है. बस आवेदन के बाद विभिन्न प्रक्रिया के बाद फाइनल मेधा सूची जारी किया गया और आज हम लोग काउंसेलिंग करा रहे हैं. अब सीट कितनी है और हमारा होगा या नहीं. मुझे मालूम नहीं. यह स्थिति बहाली की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है कि बिना तय सीट के काउंसेलिंग क्यों और कैसे? इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना निशांत गुंजन ने कहा है कि अभी सीटों की गणना चल रही है. एक अगस्त को सूची प्रकाशित की जायेगी. उन्होंने कहा कि स्कूलों से रिक्ति मांगी गयी है. संभवत: कल तक रिक्त पदों की गणना कर ली जायेगी. इधर अधिकारी की बात से इतर लोगों ने कहा कि मामला कुछ और है. रिक्त पदों को सामने रखने से मोल भाव में कमी आने की संभावना थी. रिक्त पद को गोपनीय रख अभ्यर्थियों से बात करने में आसानी होगी या हो भी चुका होगा. इस बहाली में दाल में कुछ काला होने की उम्मीद से इनकार नहीं किया जा सकता.

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