साधु-संतों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गूंज उठा पूरा इलाका

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साधु-संतों और श्रद्धालुओं के जयघोष से गूंज उठा पूरा इलाका

Sasaram news. प्रखंड के देवखैरा गांव स्थित नवनिर्मित मंदिर में मां काली की प्राणप्रतिष्ठा व नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का समापन शनिवार को हवन-पूजन और भंडारे के साथ संपन्न हो गया.

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आस्था. नौ दिवसीय प्राणप्रतिष्ठा सह शतचंडी महायज्ञ भंडारे के साथ संपन्न फोटो -3- पालकी में सवार होकर गांव भ्रमण करतीं मां काली. ए- यज्ञ मंडप का परिक्रमा करते श्रद्धालु. प्रतिनिधि, कोचस. प्रखंड के देवखैरा गांव स्थित नवनिर्मित मंदिर में मां काली की प्राण-प्रतिष्ठा व नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का समापन शनिवार को हवन-पूजन और भंडारे के साथ संपन्न हो गया. इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांव से आए श्रद्धालुओं और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मंगल कामना की. प्राण प्रतिष्ठा के लिए यज्ञ के अंतिम दिन हजारों की संख्या में नर-नारी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई थी. भीड़ के कारण मंदिर परिसर में देर शाम तक गहमा-गहमी का माहौल कायम रहा.इस बीच साधु-संतों और श्रद्धालुओं के जयकारे और जयघोष से आसपास के इलाकों में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही थी. वहीं,बसपा नेता उदय प्रताप सिंह, कोचस पूर्वी जिला पार्षद निलम पटेल, मदन मोहन तिवारी,जदयू जिला महासचिव प्रमोद कुमार पटेल,सुमन तिवारी, दयाशंकर सिंह,दीपक तिवारी, कुमार अंजनी, पप्पू सिंह, रामामुनी सिंह, दीनानाथ सिंह समेत अन्य लोग शामिल हुए. श्रद्धालुओं ने कथा और प्रवचन का किया रसपान: शतचंडी महायज्ञ के समापन को लेकर देव खैरा गांव का वातावरण पूरी तरह भक्ति की रस में सराबोर था. नवनिर्मित मां काली की प्राण- प्रतिष्ठा पूरी होने के बाद काशी से पधारे यज्ञाचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजा-अर्चना की. इससे पूर्व श्रद्धालुओं ने मां काली की प्रतिमा को पालकी मंत सवार कर पूरे गांव का भ्रमण कराया. इसके बाद गीता घाट आश्रम के बाल-ब्रह्मचारी शंकरानंद जी महाराज के नेतृत्व में शतचंडी महायज्ञ का समापन शास्त्रोक्त विधि से किया गया. इससे पहले श्रद्धालुओं को कथा अमृतपान कराते हुए काशी वाराणसी से पधारे पंडित अर्जुनानंद जी महाराज ने कहा कि सृष्टि परस्पर सहयोग से चलती है.मनुष्य को ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए,जिससे किसी प्राणी को कष्ट हो. उन्होंने अच्छे और बुरे कर्मों की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंसा शब्दों के माध्यम से भी होती है. क्योंकि अभिमान रहित शब्द हमारे सनातन की पूंजी है. महायज्ञ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में पूरे ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा.

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Anurag Sharan

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