रोहतास में 8 साल से स्कूल भवन का इंतजार, 4 KM दूर पढ़ने को मजबूर मासूम; हादसों में 2 बच्चों की मौत, फिर भी नहीं जागी सरकार

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फोटो- 1- जर्जर हो चुका पुराना भवन फोटो नंबर टू विधायक मद से बनाया गया नया स्कूल का भवन | Prabhat Khabar Network

रोहतास के प्राथमिक विद्यालय शुक्लपुरा के छात्र 8 साल से दूसरे स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं। रास्ते में हादसों के कारण अभिभावक बच्चों को भेजने से डरते हैं।

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रोहतास जिले के करगहर से रजनीकांत पांडेय की रिपोर्ट

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Rohtas News : रोहतास जिले के करगहर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय शुक्लपुरा के छात्र पिछले आठ वर्षों से अपने स्कूल भवन से दूर पढ़ने को मजबूर हैं. विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को करीब चार किलोमीटर दूर मध्य विद्यालय भलुआड़ी में पढ़ने जाना पड़ता है. लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था ने छोटे बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों की परेशानी भी बढ़ा दी है.

चार किलोमीटर का सफर, हर दिन हादसे का डर

शुक्लपुरा से भलुआड़ी जाने के दौरान बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में स्कूल आने-जाने के दौरान एक बच्चे की पानी में डूबने और दूसरे की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है. वहीं दो बच्चे हादसे में घायल भी हो चुके हैं. इन घटनाओं के बाद अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है. कई अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के बाद उनके सुरक्षित घर लौटने तक चिंतित रहते हैं.

जर्जर भवन में पढ़ने से शिक्षक और बच्चे थे भयभीत

शुक्लपुरा गांव के राम नारायण शुक्ला, दीनानाथ पासवान, जगदयाल शुक्ला, हनुमान शुक्ला, अजय पासवान, रवीन्द्र कुमार और मनोज कुमार समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन कई वर्षों से जर्जर था. भवन की स्थिति को लेकर विभाग के वरीय अधिकारियों से लिखित शिकायत भी की गई थी. जर्जर भवन में पठन-पाठन के दौरान छात्र और शिक्षक दोनों भयभीत रहते थे.

निरीक्षण के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों के आवेदन के बाद तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालय का निरीक्षण भी किया था. इसके बावजूद भवन निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई. बाद में सुरक्षा के मद्देनजर विद्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया. इससे छोटे बच्चों के सामने रोजाना चार किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी पैदा हो गई.

भलुआड़ी स्कूल में भी कमरों की कमी

प्राथमिक विद्यालय शुक्लपुरा के प्रधानाध्यापक सतेंद्र कुमार पासवान ने बताया कि मध्य विद्यालय भलुआड़ी में भी कमरों की कमी है. ऐसे में दोनों विद्यालयों के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं. सबसे अधिक परेशानी मध्याह्न भोजन बनाने में होती है. एक ही रसोईघर में दोनों विद्यालयों के बच्चों का भोजन तैयार किया जाता है.

कई बार पत्राचार, अब तक नहीं बना भवन

प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए बिहार शिक्षा परियोजना को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों की मांग पर जर्जर पुराने भवन को तोड़कर विधायक मद से एक कमरा जरूर बनाया गया है, लेकिन वह इतना छोटा है कि उसमें करीब 60 बच्चों को एक साथ बैठाना संभव नहीं है. उनका कहना है कि नया कमरा विद्यालय से अधिक यात्री शेड जैसा दिखाई देता है.

भवन बनते ही मूल विद्यालय में लौटेंगे बच्चे

इस संबंध में प्रभारी बीईओ मनोज कुमार राम ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय शुक्लपुरा के जर्जर भवन को देखते हुए बच्चों को मध्य विद्यालय भलुआड़ी में समायोजित किया गया है. विद्यालय भवन निर्माण के लिए बिहार शिक्षा परियोजना को पत्र भेजा गया है. भवन का निर्माण होते ही बच्चों को वापस उनके मूल विद्यालय में भेज दिया जाएगा.


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