2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट की मांग, सांसद ने संसद सत्र में मुद्दा उठाने का दिया भरोसा

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Rohtas Teachers' Protest: Demand for TET exemption for teachers appointed

ज्ञापन देते शिक्षक

Rohtas Teachers Protest : शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधन) 2017 के तहत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में जिला प्राथमिक शिक्षक संघ, रोहतास ने गुरुवार को सांसद मनोज राम भारती को ज्ञापन सौंपा. संघ ने वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने और संशोधित प्रावधान को वापस लेने की मांग की.

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Rohtas Teachers Protest : शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधन) 2017 के तहत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में जिला प्राथमिक शिक्षक संघ, रोहतास ने गुरुवार को सांसद मनोज राम भारती को ज्ञापन सौंपा. संघ ने वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने और संशोधित प्रावधान को वापस लेने की मांग की. सांसद ने शिक्षकों की मांगों को संसद के आगामी मानसून सत्र में उठाने का आश्वासन दिया.

जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव अखिलेश्वर कुमार सिंह के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल ने सांसद को बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधन) 2017 और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद देशभर के करीब 30 लाख शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पांच वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने और प्रोन्नति पाने हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है. इससे वर्ष 2011 से पहले नियुक्त बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित होंगे.

Rohtas News : 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग

संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की व्यवस्था वर्ष 2011 से लागू हुई थी. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने स्पष्ट किया था कि अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की बाध्यता लागू नहीं होगी. लेकिन शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधन) 2017 लागू होने के बाद यह स्थिति बदल गई.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन नियमों और सेवा शर्तों के अनुसार हुई थी. वर्षों का शिक्षण अनुभव रखने वाले इन शिक्षकों ने समय-समय पर विभागीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है. ऐसे में उन पर टीईटी की नई शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है.

‘निर्णय से बढ़ेगा मानसिक तनाव, प्रभावित होगी पढ़ाई’

शिक्षक नेताओं ने सांसद को बताया कि सरकार के इस निर्णय से हजारों शिक्षकों में असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है. इसका सीधा असर विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस विषय पर पुनर्विचार कर पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दे.

सांसद ने दिया संसद में मुद्दा उठाने का भरोसा

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद सांसद मनोज राम भारती ने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को संसद के आगामी मानसून सत्र में उठाएंगे तथा संबंधित मंत्रालय के समक्ष भी रखेंगे.

इस दौरान विजय शंकर प्रसाद, शशांक शिव शेखर, मुनमुन पंडित, बिंदेश्वरी पाल, कमलेश कुमार, वैकुंठ राम, राकेश रंजन वर्मा, शशि भूषण, विकास रंजन, दिनेश पासवान समेत जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे.

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