रोहतास: बिहार विधानसभा तक पहुंचा अवैध बूचड़खानों का मामला, बिक्रमगंज विधायक ने सरकार से मांगा जवाब
रोहतास के बिक्रमगंज अनुमंडल में अवैध बूचड़खानों का मुद्दा बिहार विधानसभा तक पहुंच गया है. स्थानीय विधायक आलोक कुमार सिंह ने इस गंभीर मामले को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. स्थानीय शिकायतों और स्वास्थ्य, पर्यावरण पर बढ़ते असर के कारण इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है.
Rohtas Illegal Slaughterhouses Issue Reaches Bihar Assembly : रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल में अवैध बूचड़खानों का मुद्दा अब बिहार विधानसभा तक पहुंच गया है. स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों और लगातार मिल रही सूचनाओं के बीच बिक्रमगंज के विधायक आलोक कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है.
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उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और समयबद्ध रिपोर्ट देने की मांग की. विधायक के इस सवाल के बाद संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया तेज होने की संभावना है.
Bihar Vidhan Sabha : स्थानीय स्तर पर बढ़ रही थी शिकायतें
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से क्षेत्र के कई गांवों और बाजारों में अवैध बूचड़खानों के संचालन को लेकर लोगों में नाराजगी थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बूचड़खानों के कारण न सिर्फ गंदगी फैल रही है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है. कई जगहों पर बिना किसी अनुमति के पशुओं का वध किए जाने की बातें सामने आई हैं.
Bikramganj MLA : प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव
मामला उठने के बाद अब प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है. अधिकारियों का कहना है कि अगर अवैध गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियां दोबारा न हों.
स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध बूचड़खानों का संचालन सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है. बिना नियमों के चल रहे ऐसे स्थानों पर साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है. ऐसे में इस पर सख्ती से रोक लगाना बेहद जरूरी है.
बिक्रमगंज में अवैध बूचड़खानों का मामला अब सिर्फ स्थानीय नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य स्तर का मुद्दा बन चुका है.
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