राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सासाराम में कार्यक्रम, बुनकरों की आय बढ़ाने पर जोर

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फोटो-जिला उद्योग केन्द्र में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर शामिल अधिकारी व बुनकर | Prabhat Khabar Network

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सासाराम में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

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Rohtas News : रोहतास जिला उद्योग केंद्र में शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में बुनकरों, उद्यमियों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया. इस दौरान हथकरघा उद्योग को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने के साथ बुनकरों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया.

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स्वदेशी परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है हथकरघा

जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक आशीष रंजन ने बुनकरों को संबोधित करते हुए कहा कि हथकरघा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्वदेशी परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. सात अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में हर वर्ष राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है. यह दिवस देश के लाखों बुनकरों के कौशल, मेहनत और रचनात्मकता को सम्मान देने का अवसर है.

आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की जरूरत

आशीष रंजन ने कहा कि रोहतास अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और उद्यमशीलता के लिए जाना जाता है. ऐसे में पारंपरिक बुनाई कला को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बेहतर मार्केटिंग से जोड़ने की जरूरत है. इससे स्थानीय हथकरघा उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.

बुनकरों की आय बढ़ाने से रोजगार के अवसर होंगे पैदा

महाप्रबंधक ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बाजार से जोड़ने से बुनकरों की आय में वृद्धि होगी. साथ ही युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. बिहार सरकार के उद्योग विभाग और जिला उद्योग केंद्र की ओर से हथकरघा एवं कुटीर उद्योगों के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील

उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत बुनकरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, उद्यम स्थापना, विपणन सहयोग और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने बुनकरों और युवाओं से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की.

'वोकल फॉर लोकल' से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार

महाप्रबंधक ने लोगों से 'वोकल फॉर लोकल' की भावना अपनाते हुए स्थानीय हथकरघा उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है.

नई पीढ़ी तक पहुंचे पारंपरिक शिल्प

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और हथकरघा क्षेत्र को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया. आशीष रंजन ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से रोहतास हथकरघा और कुटीर उद्योग के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएगा. कार्यक्रम में विभिन्न बुनकर संघों के प्रतिनिधि, बुनकर तथा जिला उद्योग केंद्र के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.


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