Bihar EV Subsidy: मुख्यमंत्री पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना के तहत, अब सिर्फ 8 कार्य दिवस में मिलेगी सब्सिडी

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8 कार्य दिवस में पूरी होगी आवेदन प्रक्रिया

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बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदारों के लिए सब्सिडी प्रक्रिया को तेज कर दिया है. नई SOP के तहत, आवेदन सत्यापन से लेकर सब्सिडी भुगतान तक की प्रक्रिया अधिकतम 8 कार्य दिवसों में पूरी की जाएगी. यह योजना 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी.

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Bihar EV Subsidy SOP : बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने वालों को बड़ी राहत दी है. परिवहन विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए आवेदन के सत्यापन, अनुमोदन और सब्सिडी भुगतान की पूरी प्रक्रिया अधिकतम 8 कार्य दिवस में पूरी करने का निर्देश दिया है.

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Bihar News : 8 कार्य दिवस में पूरी होगी आवेदन प्रक्रिया

नई एसओपी के अनुसार मोटरयान निरीक्षक (MVI) को आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन पांच कार्य दिवस के भीतर करना होगा. इसके बाद जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) तीन कार्य दिवस में आवेदन का अनुमोदन करेंगे. विभाग का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना है.

Rohtas News : किन वाहनों को मिलेगा योजना का लाभ?

योजना का लाभ केवल Pure Electric Vehicle (PEV) खरीदने वालों को मिलेगा. हाइब्रिड वाहन इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे. साथ ही वाहन की खरीद और पंजीकरण 15 मई 2026 के बाद का होना जरूरी है. यह योजना 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी.

Google Form से होगा आवेदन, ई-मेल पर मिलेगी जानकारी

वाहन स्वामी को गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन संबंधित जिले की गूगल शीट में उपलब्ध होगा, जहां एमवीआई और डीटीओ उसकी समीक्षा करेंगे. यदि किसी कारण से आवेदन अस्वीकृत होता है तो उसका कारण दर्ज कर आवेदक को ई-मेल के माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा.

'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर मिलेगी सब्सिडी

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रोत्साहन राशि का भुगतान 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाएगा. आवेदन के क्रम में ही लाभ मिलेगा. बिना वैध कारण के इस क्रम को बदलने पर संबंधित डीटीओ की जवाबदेही तय की जाएगी.

गलत भुगतान पर अधिकारी होंगे जिम्मेदार

सब्सिडी जारी होने के बाद भुगतान की तिथि, यूटीआर संख्या और राशि का विवरण गूगल शीट में अपडेट करना अनिवार्य होगा. विभाग ने साफ किया है कि गलत सत्यापन, लापरवाही या गलत भुगतान के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. यह व्यवस्था एनआईसी के समर्पित सॉफ्टवेयर लागू होने तक प्रभावी रहेगी.


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