रोहतास: चांदी गांव में ऑटिज्म जागरूकता शिविर, 55 अभिभावकों और ग्रामीणों को विशेषज्ञों ने दी जरूरी जानकारी

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फोटो कैप्शन 7 : चांदी गांव में ऑटिज्म जागरूकता शिविर में अभिभावकों को जानकारी देते नारायण केयर के विशेषज्ञ. | Prabhat Khabar Network

सासाराम के चांदी गांव में नारायण मेडिकल कॉलेज द्वारा ऑटिज्म जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 55 लोगों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण जानकारी ली।

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Rohtas News : रोहतास के अंकोढीगोला प्रखंड के चांदी गांव में नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के तत्वावधान में ऑटिज्म जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. शिविर का उद्देश्य ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में ऑटिज्म को लेकर जागरूकता बढ़ाना, अभिभावकों की भ्रांतियां दूर करना और प्रभावित बच्चों के लिए उपलब्ध उपचार व सरकारी योजनाओं की जानकारी देना रहा. शिविर में 55 लाभार्थियों ने हिस्सा लिया.

ऑटिज्म को लेकर अभिभावकों की भ्रांतियां की गयीं दूर

शिविर में नारायण केयर पुनर्वास केंद्र के विशेषज्ञों ने अभिभावकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्थानीय लोगों को ऑटिज्म के लक्षण, कारण, पहचान और उपचार की जानकारी सरल भाषा में दी. विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटिज्म मानसिक बीमारी या माता-पिता की गलती नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के विकास से जुड़ी स्थिति है. शुरुआती पहचान, उचित मार्गदर्शन और नियमित थेरेपी से बच्चों के विकास में सुधार लाया जा सकता है.

2 से 8 वर्ष तक के बच्चों की हुई प्रारंभिक जांच

शिविर में दो से आठ वर्ष तक के बच्चों का प्रारंभिक अवलोकन और जांच की गयी. जिन बच्चों में ऑटिज्म से जुड़े लक्षण मिले, उनके अभिभावकों को आगे की जांच और आवश्यक थेरेपी के लिए परामर्श दिया गया. विशेषज्ञों ने अभिभावकों से बच्चों के व्यवहार और विकास में दिखने वाले संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की.

सरकारी योजनाओं की भी दी गयी जानकारी

अभिभावकों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, निःशक्त पेंशन, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गयी. विशेषज्ञों ने बताया कि पात्र बच्चों और परिवारों को सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है.

स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी के महत्व पर जोर

शिविर में ऑक्यूपेशनल थेरेपी, व्यवहारिक थेरेपी, वाक् थेरेपी, फिजियोथेरेपी और विशेष शिक्षा के महत्व के बारे में भी बताया गया. फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. आशीष कुमार, नैदानिक मनोवैज्ञानिक गुलजार अहमद और विशेष शिक्षिका प्रगति मौर्या ने अभिभावकों को बच्चों की जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन दिया.

बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने की दी जाती है ट्रेनिंग

डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि बच्चों को स्कूल पूर्व तैयारी का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल जाने और अन्य बच्चों के साथ पढ़ाई करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद करना है.

हर शनिवार अलग-अलग गांवों में लगेगा जागरूकता शिविर

नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की चिकित्सा निदेशक डॉ. आकांक्षा सिंह ने संदेश के माध्यम से ऑटिज्म के लक्षण वाले बच्चों को नारायण केयर बाल पुनर्वास केंद्र लाने की अपील की. केंद्र की प्रभारी डॉ. शिवानी चतुर्वेदी ने बताया कि ऐसे जागरूकता शिविर प्रत्येक शनिवार को अलग-अलग गांव या प्रखंड में आयोजित किये जायेंगे. उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना और प्रभावित बच्चों व उनके अभिभावकों को उचित मार्गदर्शन देना नारायण केयर का सामाजिक दायित्व है.


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