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प्रशासनिक कार्यशैली के कारण दो गांवों के 1501 वोटरों ने नहीं मनाया लोकतंत्र का उत्सव

Updated at : 12 Nov 2025 8:02 PM (IST)
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प्रशासनिक कार्यशैली के कारण दो गांवों के 1501 वोटरों ने नहीं मनाया लोकतंत्र का उत्सव

इन गांवों पर बने बूथों की इवीएम लौट गयी खाली, शिवसागर प्रखंड के रोझई गांव में स्कूल निर्माण, तो कोनकी गांव में पंचायत भवन निर्माण की मांग को लेकर किया वोट का बहिष्कार

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शिवसागर प्रखंड के रोझई गांव में स्कूल निर्माण, तो कोनकी गांव में पंचायत भवन निर्माण की मांग को लेकर किया वोट का बहिष्कार फोटो-12- रोझईं गांव के बूथ संख्या 118 पर वोट बहिष्कार के बाद लोगों से बात करते लोजपा रामविलास के प्रत्याशी मुरारी प्रसाद गौतम. ए- रोझई गांव में पहले स्कूल, फिर वोट का नारा लगाते बच्चे. प्रतिनिधि, शिवसागर इसे प्रशासनिक कार्यशैली का नतीजा कहेंगे या लोगों की इस लोकतंत्र में हठधर्मिता. यह अपनी-अपनी सोच हो सकती है. पर, लोकतंत्र के इस महापर्व में शिवसागर प्रखंड के दो गांव रोझई और कोनकी के 1501 वोटरों ने सबसे जरूरी यह त्योहार नहीं मनाया. इन दोनों गांवों के मतदान केंद्र पर एक भी वोट नहीं दिया गया. इस कारण इन बूथों की इवीएम खाली ही लौट गयी. रोझई में सबसे जरूरी शिक्षा के लिए स्कूल भवन निर्माण की मांग थी, तो कोनकी पंचायत सरकार भवन निर्माण की. यह दोनों मांगें नयी नहीं थी, बल्कि वर्षों पुरानी थीं. दोनों मांगों की पूर्ति सरकारी जमीन पर होना चाहिए था, पर ऐसा हो नहीं सका और इन गांवों के लोगों ने लोकतंत्र के महापर्व से अपने को दूर कर लिया. 11 नवंबर को पूरा जिला लोकतंत्र का उत्सव मना रहा था, तो रोझई और कोनकी के ग्रामीण वोटर आंदोलित थे. ग्रामीणों के सामने निरुत्तर होकर लौटे प्रत्याशी इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार और उनके बाद लोजपा रामविलास पार्टी के प्रत्याशी मुरारी प्रसाद गौतम भी ग्रामीणों को समझाने पहुंचे. पर, वे ग्रामीणों के तर्क के सामने निरुत्तर हो लौट गये. दोनों के पास जवाब नहीं था कि तीन-तीन वर्ष से ये मांगें पूरी क्यों नहीं हुईं? जबकि, लोकसभा चुनाव के दौरान भी वोट बहिष्कार की घोषणा को निर्माण के आश्वासन के बाद लोगों ने वापस ले लिया था. जब विधानसभा चुनाव आने तक मांग पूरी नहीं हुई, तो ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया और आंदोलन का रास्ता पकड़ लिये. इस संबंध में जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी उदिता सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं वहां जाकर क्या करूंगी? यह मेरा काम नहीं. हालात बिगड़ते गये और शाम छह बजे तक मतदान का समय समाप्त हुआ. दोनों गांवों के इवीएम खाली लौट गये. बच्चों के भविष्य व लोकतंत्र के लिए ग्रामीणों ने लड़ी लड़ाई: रोझई गांव के बूथ नंबर-118 में कुल 668 मतदाता हैं. इनमें 368 पुरुष व 300 महिलाएं थीं. ये कुल 668 मतदाता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे थे. वहीं, कोनकी गांव के बूथ नंबर-204 में कुल 833 मतदाताओं में 434 पुरुष व 399 महिलाएं लोकतंत्र की मजबूती के लिए निचले स्तर के शासन व्यवस्था के लिए जरूरी पंचायत भवन के लिए लड़ाई लड़ रहे थे. इन दोनों गांवों के 1501 मतदाताओं के बहिष्कार के बावजूद चेनारी विधानसभा क्षेत्र में 65.17 प्रतिशत मतदान हुआ. इसमें 1501 मतदाताओं का प्रतिशत जुड़ता, तो अंकगणित का प्रतिशत कुछ और बदला नजर आता.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANCHDEV KUMAR

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PANCHDEV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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