छपरा. छपरा को नगर निगम का दर्जा मिले आठ साल से अधिक समय हो चुका है और इस दौरान शहर में कई पायलट प्रोजेक्ट पर काम हुआ है. कुछ आवश्यक सुविधाएं बढ़ी भी हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर का माहौल लोगों के लिए सहज नहीं है. यहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ जो लोग बाहर से छपरा आते हैं, उन्हें भी कई बार मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. शहर में साफ-सफाई की कमी, पेयजल का अभाव, वाहनों को पार्क करने की चुनौती और सड़क पर उड़ती धूल लोगों को परेशान करती है. इसके अलावा, ट्वायलेट, यूरिनल, यात्री पड़ाव, और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. कई बार दूसरे जिले और प्रदेशों से लोग अपने परिजनों से मिलने के लिए ट्रेन और बसों से यात्रा पूरी कर छपरा पहुंचते हैं, लेकिन जब वे छपरा आते हैं, तो जंक्शन या बस स्टैंड से बाहर आते ही उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
बुनियादी सुविधाओं का सुधार आवश्यक
शहर में बुनियादी सुविधाओं की कमी स्पष्ट रूप से नजर आती है. यात्री पड़ाव या बाजार जैसी जगहों पर यूरिनल, शौचालय, पार्किंग स्टैंड, यात्री शेड जैसी सुविधाओं की कमी सालों से लोग झेल रहे हैं. इसके अलावा, अतिक्रमण के कारण सड़क जाम की समस्या भी शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है. शहर में हो रहे निर्माण कार्यों में कंपनियों और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी भी शहर की छवि को सुधारने में अवरोध उत्पन्न कर रही है. उदाहरण के तौर पर, छह माह पहले बनायी गयी सड़क को अब तोड़कर पाइपलाइन बिछायी जा रही है. एक ही मुहल्ले में तीन से चार प्रोजेक्ट्स एक साथ चल रहे हैं, जिससे कोई भी कार्य सही तरीके से पूरा नहीं हो पा रहा है. इन समस्याओं को सुधारने की आवश्यकता है ताकि शहर की बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो सकें.सभी व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा
शहर में साफ-सफाई समेत अन्य सभी व्यवस्थाओं को बेहतर करने का प्रयास हो रहा है. शहर का माहौल बदले इसके लिये कई प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है. लक्ष्मी नारायण गुप्ता, मेयर, छपरा नगर निगमडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है