2024 में वकील पिता-पुत्र की हत्या, अब मुख्य गवाह भतीजे का मर्डर…पढ़िए छपरा के ट्रिपल हत्याकांड की पूरी कहानी

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युवक की मौत के बाद सदर अस्पताल में मौजूद पुलिस

Chhapra Triple Murder Case: 12 जून 2024 को बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े वकील पिता-पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी. वहीं, करीब दो साल बाद 28 जून 2026 को इसी चर्चित हत्याकांड के मुख्य गवाह भतीजे की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई.

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Chhapra Triple Murder Case : सारण जिले के चर्चित वकील पिता-पुत्र हत्याकांड मामले में एक बार फिर चर्चा में है. वर्ष 2024 में दिनदहाड़े वकील पिता-पुत्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अब ठीक दो साल बाद 28 जून 2026 की रात उसी मामले से जुड़े मुख्य चश्मदीद गवाह भतीजे की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि उसका छोटा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और चर्चित हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.

क्या है ताजा मामला?

रविवार रात छपरा शहर के मुफस्सिल थाना इलाके के मेथवलिया गांव में बदमाशों ने गोलीबारी कर दी. इस हमले में रामदेव राय के 32 वर्षीय पुत्र पंकज कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके 26 वर्षीय छोटे भाई मनीष कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए. मनीष के कान में गोली लगी है और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है.

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मृतक की पत्नी ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

मृतक पंकज कुमार की पत्नी ने आरोप लगाया कि उनके पति की तबीयत खराब थी. इसके बावजूद रविवार रात मुफस्सिल थाना से उन्हें लगातार फोन कर बुलाया जा रहा था. उनका कहना है कि गांव के पास 112 डायल पुलिस की गाड़ी भी मौजूद थी. आरोप के अनुसार, जैसे ही उनके पति छोटे भाई के साथ घर से निकले, मेथवलिया चौक के पास अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी. उन्होंने सुरक्षा नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए हैं. इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है.

पुलिस ने क्या कहा?

घटना की सूचना मिलते ही एएसपी रामपुकार सिंह सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्होंने पूरे मामले की जानकारी लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है. घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सदर अस्पताल पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई होती तो इस घटना को रोका जा सकता था.

आखिर किस दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है यह मामला?

इस ताजा हत्याकांड की जड़ें 12 जून 2024 की उस घटना से जुड़ी हैं, जब छपरा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में बेखौफ अपराधियों ने कोर्ट जा रहे अधिवक्ता राम अयोध्या राय और उनके अधिवक्ता पुत्र सुनील राय की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी. दोनों पिता-पुत्र मेथवलिया गांव से मोटरसाइकिल पर सवार होकर छपरा सिविल कोर्ट जा रहे थे. जैसे ही वे दूधिया पुल के समीप पहुंचे, पहले से घात लगाए बाइक सवार अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.

कैसे दिया गया था वारदात को अंजाम?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीन मोटरसाइकिल पर सवार पांच अपराधियों ने पहले पिता राम अयोध्या राय के सिर में गोली मारी. इसके बाद पुत्र सुनील राय ने बचने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों ने उन्हें पकड़कर सीने और पेट में कई गोलियां मार दीं. अस्पताल की जांच में सामने आया था कि पिता को दो और पुत्र को तीन गोलियां लगी थीं. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी.

पहले भी हो चुका था हमला

परिजनों और अधिवक्ताओं के अनुसार जमीन विवाद को लेकर इससे पहले भी इस परिवार पर कई बार जानलेवा हमला हो चुका था. बताया गया था कि घटना के दो वर्ष पहले भी अधिवक्ता राम अयोध्या राय पर हमला हुआ था, जिसमें गोली उनकी कनपटी को छूते हुए निकल गई थी और वे बाल-बाल बच गए थे. उसी हमले में उनके भतीजे को गोली लगी थी और वह घायल हो गया था. परिजनों का दावा था कि इससे पहले मोटरसाइकिल से कुचलकर हत्या की भी कोशिश की गई थी, लेकिन अपराधी सफल नहीं हो सके थे.

हत्या के पीछे क्या था कारण?

2024 की घटना के बाद तत्कालीन पुलिस जांच में सामने आया था कि हत्या का कारण मुफस्सिल थाना क्षेत्र की घोष कॉलोनी से जुड़ा जमीन विवाद था. तत्कालीन एसपी डॉ. कुमार आशीष ने एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था. जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, टेक्निकल एविडेंस और एफएसएल जांच के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी. मृतक के भाई सत्यदेव प्रसाद यादव की शिकायत पर सात लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था.

हत्या के बाद वकीलों में था भारी आक्रोश

अधिवक्ता पिता-पुत्र की हत्या के बाद पूरे छपरा व्यवहार न्यायालय में आक्रोश फैल गया था. न्यायिक कार्य बंद कर दिया गया था और बड़ी संख्या में अधिवक्ता सदर अस्पताल पहुंच गए थे. राम अयोध्या राय पूर्व में अपर लोक अभियोजक (एपीपी) भी रह चुके थे, जबकि उनके पुत्र सुनील राय भी उनके साथ वकालत करते थे.

अब मुख्य गवाह के परिवार पर हमला

अब दो साल बाद उसी चर्चित मामले से जुड़े मुख्य चश्मदीद गवाह के परिवार पर हमला हुआ है. इस हमले में गवाह के भतीजे पंकज कुमार की मौत हो गई है, जबकि उनके छोटे भाई मनीष कुमार जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. मृतक की पत्नी का आरोप है कि पुलिस द्वारा लगातार बुलाए जाने के बाद उनके पति घर से निकले थे और रास्ते में उन पर हमला कर दिया गया. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना के हर पहलू की पड़ताल की जा रही है.

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साक्षी कुमारी

लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

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