दो हफ्ते की खांसी को न करें नजरअंदाज, छपरा की दलित बस्ती में 38 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग

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स्वास्थ्य जांच करते चिकित्सक

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स्वास्थ्य विभाग ने टीबी की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों के साथ-साथ बस्तियों में भी लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है. इसी क्रम में सदर प्रखंड के लाल बाजार स्थित दलित बस्ती में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जहां 38 ग्रामीणों की टीबी स्क्रीनिंग की गई.

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Nischay Poshan Yojana: टीबी की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब अस्पतालों के साथ-साथ बस्तियों में पहुंचकर भी लोगों की स्क्रीनिंग कर रहा है. इसी अभियान के तहत सदर प्रखंड के लाल बाजार स्थित दलित बस्ती में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. शिविर में 38 ग्रामीणों की टीबी स्क्रीनिंग की गयी और सभी चिन्हित लोगों का छाती का एक्स-रे कराया गया.

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विश्व फेफड़ा दिवस के अवसर पर आयोजित शिविर में ग्रामीणों को टीबी के शुरुआती लक्षण, जांच की सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गयी. बीमारी की पुष्टि होने पर जल्द उपचार शुरू कराने पर भी जोर दिया गया. शिविर का आयोजन स्वास्थ्य विभाग ने इंडियन चेस्ट सोसाइटी, बिहार के सहयोग से किया.

दो हफ्ते की खांसी को न करें नजरअंदाज

शिविर में चिकित्सक डॉ. राजीव रंजन ने ग्रामीणों की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, कमजोरी या थकान जैसे लक्षण रहें, तो इसे सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

ऐसे लक्षण दिखने पर समय पर टीबी की जांच कराना जरूरी है. शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से उपचार जल्द शुरू किया जा सकता है और संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद मिलती है.

वंचित बस्तियों तक पहुंच रही जांच की सुविधा

स्वास्थ्य विभाग की टीबी जांच अब केवल अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों तक आने वाले मरीजों तक सीमित नहीं है. संभावित मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्यकर्मी समुदाय के बीच पहुंचकर स्क्रीनिंग कर रहे हैं.

लाल बाजार की दलित बस्ती में आयोजित शिविर का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना था, जो लंबे समय से खांसी या अन्य संभावित लक्षणों से परेशान हैं, लेकिन किसी कारण से स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते.

सीबीनेट और चेस्ट एक्स-रे की सुविधा

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को टीबी की जांच के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी. इनमें सीबीनेट जांच, चेस्ट एक्स-रे और जरूरत के अनुसार अन्य जांच शामिल हैं.

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर जांच से टीबी की पहचान जल्द की जा सकती है. बीमारी की पुष्टि होने पर मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार दिया जाता है. टीम ने ग्रामीणों को बताया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है. नियमित रूप से दवा लेने और उपचार की पूरी अवधि पूरी करने से मरीज स्वस्थ हो सकता है.

सरकारी केंद्रों पर नि:शुल्क जांच और दवा

टीबी डीपीसी हिमांशु शेखर ने बताया कि जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की नि:शुल्क जांच और दवा उपलब्ध है. बीमारी की पुष्टि होने के बाद मरीज को निर्धारित उपचार दिया जाता है और स्वास्थ्यकर्मी उपचार की निरंतरता पर नजर रखते हैं.

उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान दवा नियमित रूप से लेना जरूरी है. बीच में दवा छोड़ने या अनियमित रूप से दवा लेने से उपचार प्रभावित हो सकता है.

निक्षय पोषण योजना से मिल रही आर्थिक सहायता

टीबी मरीजों के उपचार के दौरान पोषण की स्थिति बेहतर रखने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता का प्रावधान भी है. शिविर में ग्रामीणों को निक्षय पोषण योजना की जानकारी दी गयी.

स्वास्थ्य विभाग की दी गयी जानकारी के अनुसार पात्र टीबी मरीजों को उपचार अवधि के दौरान प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में उपलब्ध करायी जा रही है. इसका उद्देश्य मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में आर्थिक मदद देना है.

निक्षय मित्र बनकर मरीजों की कर सकते हैं मदद

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को निक्षय मित्र योजना के बारे में भी जानकारी दी. इसके तहत सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक टीबी मरीजों को पोषण किट और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करा सकते हैं.

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी उन्मूलन के लिए दवा के साथ मरीज के पोषण, नियमित उपचार और सामाजिक सहयोग पर भी ध्यान देना जरूरी है.

समय पर जांच ही बचाव का सबसे मजबूत कदम

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी की रोकथाम में लक्षणों की जल्द पहचान और समय पर जांच महत्वपूर्ण है. लगातार खांसी या अन्य संभावित लक्षण दिखने पर बिना देरी किये स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए.

शिविर में ग्रामीणों से अपील की गयी कि वे खुद भी जागरूक रहें और परिवार या आसपास के किसी व्यक्ति में टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर उसे जांच के लिए प्रेरित करें.

38 लोगों की स्क्रीनिंग से संभावित मरीजों की पहचान का प्रयास

लाल बाजार की दलित बस्ती में आयोजित शिविर के दौरान 38 लोगों की स्क्रीनिंग और एक्स-रे कराया गया. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तथा वंचित परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है.

मौके पर टीबी-डीपीसी हिमांशु शेखर, एसटीएस-टीबी मुकेश कुमार, एक्स-रे तकनीशियन अभिलाषा समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मी मौजूद रहे.

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