प्रकृति की मार से किसान हुए चिंतित

Updated at : 18 Jun 2019 5:07 AM (IST)
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प्रकृति की मार से किसान हुए  चिंतित

छपरा (सदर) : खरीफ फसल के दौरान धान की रोपनी के लिए बिचड़े को गिराने के साथ-साथ मक्का, बाजरा आदि खरीफ फसलों की बुआई का उपयुक्त समय बीत रहा है. परंतु, बारिश नहीं होने के कारण तथा पूर्व में भी सूखे की स्थिति के कारण जिन खेतों में फसल बोयी जानी है, वो चाहे मक्का […]

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छपरा (सदर) : खरीफ फसल के दौरान धान की रोपनी के लिए बिचड़े को गिराने के साथ-साथ मक्का, बाजरा आदि खरीफ फसलों की बुआई का उपयुक्त समय बीत रहा है. परंतु, बारिश नहीं होने के कारण तथा पूर्व में भी सूखे की स्थिति के कारण जिन खेतों में फसल बोयी जानी है, वो चाहे मक्का बोने का खेत हो या धान का बिचड़ा गिराने या बोने का, सभी में धूल उड़ रही है.
भीषण गर्मी एवं लगातार अल्प वर्षा के कारण किसानों के खेतों में वीरानगी छायी हुई है. खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं. किसानों का कहना है कि मृगश्रा नक्षत्र आठ जून से जारी है तथा 21 जून तक चलेगा. 22 जून से आद्रा नक्षत्र शुरू हो जायेगा. इस नक्षत्र में धान की रोपनी करने पर बेहतर उत्पादन होता है. परंतु, बारिश नहीं होने के कारण चाहकर भी खेतों में धान का बिचड़ा नहीं डाला जा रहा है.
इसकी वजह यह है कि यदि बारिश नहीं होने पर सिंचाई कर धान की बिचड़ा डाला जाता है, तो निजी नलकूप से सिंचाई कर बिचड़ा डालने के बाद तेज धूप से बिचड़े को बचाना मुश्किल हो जायेगा. किसानों का कहना है कि नहर से भी अभी तक पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे आगामी खरीफ मौसम में भी सरकार विभिन्न योजनाओं में चाहे कितनी भी सहायता दे, परंतु बेहतर फसल उत्पादन की संभावना कम होती जा रही है.
25 से 30 जून तक सारण की नहरों में आ सकता है पानी : भीषण गर्मी, अल्प वृष्टि के बीच किसानों की खेती में उत्पन्न समस्या पर कुछ हद तक निजात पाने को ले सारण के डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सिंचाई सृजन जल संसाधन विभाग सीवान के मुख्य अभियंता को पत्राचार कर 25 जून तक सारण के नहरों में पानी उपलब्ध कराने की जरूरत जतायी थी. इसमें डीएम ने नहरों में पानी नहीं आने से किसानों को हो रही कृषि में समस्या का जिक्र किया था.
वहीं कृषि टास्क फोर्स की बैठक के दौरान सभी नहर प्रमंडल के पदाधिकारियों तथा कृषि विभाग के पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के नहर प्रणाली में भ्रमण कर आवश्यक तैयारी करने का निर्देश भी दिया था, जिससे किसानों द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार नहर प्रणाली के आउलेट खराब, क्षतिग्रस्त हैं, तो उनकी मरम्मत कर नहर के अंतिम छोड़ तक पानी पहुंचाया जा सके. इस संबंध में सारण नहर प्रमंडल के अधीक्षण अभियंता उमानाथ ने बताया कि सारण की नहरों में वाल्मीकि नगर बराज से 25 जून से 30 जून के बीच पानी पहुंच जायेगा. 25 जून को पूर्व से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पानी छोड़ना है.
चूंकि जिस मार्ग से पानी को आना है. उसमें गोपालगंज जिले में बन रहा एक पुल है जिसके निर्माण का कार्य 25 जून को पूरा हो जायेगा. इसके बाद नहर प्रमंडल पानी छोड़ देगा. मालूम हो कि गत वर्ष भी नहरों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों को बिचड़ा गिराने से लेकर धान की खेती करने के अलावा रबी मौसम में भी सिंचाई में भारी परेशानी हुई.
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