समस्तीपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए बनेंगे सेफ स्कूल जोन, स्कूलों के पास होंगे विशेष इंतजाम

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सांकेतिक तस्वीर

समस्तीपुर में स्कूली छात्र-छात्राओं की सड़क सुरक्षा को लेकर 'सेफ स्कूल जोन' विकसित किए जा रहे हैं. इन जोन में गति-सीमा बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रॉसिंग और ट्रैफिक वालंटियर की तैनाती जैसी व्यवस्थाएं होंगी.

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Samastipur News: जिले में स्कूली छात्र-छात्राओं की सड़क दुर्घटनाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है. अब जिले के प्रमुख स्कूलों के आसपास सेफ स्कूल जोन विकसित किए जाएंगे. राज्य परिवहन विभाग ने समस्तीपुर सहित सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. शहर में करीब एक दर्जन विद्यालय ऐसे हैं, जो मुख्य सड़कों के आसपास स्थित हैं.

स्कूलों के आसपास बनेगा सेफ स्कूल जोन

सेफ स्कूल जोन का उद्देश्य विद्यालय आने-जाने वाले बच्चों को सड़क दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखना है. इसके तहत स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ वाहन चालकों को गति नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के लिए जागरूक किया जाएगा.

स्पीड लिमिट बोर्ड और स्पीड ब्रेकर होंगे स्थापित

सेफ स्कूल जोन में स्कूल परिसर के आसपास स्पष्ट चेतावनी एवं गति-सीमा बोर्ड लगाए जाएंगे. वाहनों की तेज रफ्तार पर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक तरीके से स्पीड ब्रेकर बनाए जाएंगे. इससे स्कूल खुलने और छुट्टी के समय तेज गति से चलने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.

जेब्रा क्रॉसिंग और आधुनिक सिग्नलिंग की होगी व्यवस्था

स्कूली बच्चों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाएगी. जरूरत के अनुसार आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे. इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों और अन्य राहगीरों के लिए सड़क पार करना अधिक सुरक्षित बनाना है.

स्कूलों के बाहर तैनात होंगे ट्रैफिक वालंटियर

स्कूल खुलने और छुट्टी के समय यातायात को सुचारू एवं अनुशासित रखने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित ट्रैफिक वालंटियर तैनात किए जाएंगे. ये वालंटियर भीड़ नियंत्रण और बच्चों के सुरक्षित आवागमन में सहयोग करेंगे.

केंद्र की पहल के बाद राज्य स्तर पर तेज हुआ काम

इस योजना की रूपरेखा भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में तैयार की गई थी. जिला सड़क सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने और उसकी नियमित समीक्षा के लिए डिजिटल पोर्टल शुरू करने पर भी चर्चा हुई थी. गैर-सरकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन की सिफारिशों के आधार पर स्कूलों के आसपास बच्चों की सुरक्षा के लिए सेफ स्कूल जोन विकसित करने पर जोर दिया गया.

बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

परिवहन विभाग के निर्देश के अनुसार विद्यालय आने-जाने के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. प्रशासन का मानना है कि सेफ स्कूल जोन बनने से स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सकेगा. इससे अभिभावकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है.

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