समस्तीपुर: विश्व स्तनपान सप्ताह पर आईएपी की वैज्ञानिक संगोष्ठी, मां का दूध बच्चे के लिए बताया जीवनदायिनी

कार्यक्रम का उदघाटन करते चिकित्सक | Prabhat Khabar Network
विश्व स्तनपान सप्ताह पर समस्तीपुर में आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए मां के दूध के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
World Breastfeeding Week: विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी), समस्तीपुर शाखा द्वारा रविवार को स्थानीय आईएमए हॉल में वैज्ञानिक संगोष्ठी सह जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस वर्ष की थीम "जीवन की टिकाऊ शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें" रखी गई थी. संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रमन किशोर ने दीप प्रज्वलित कर किया. रोसड़ा के विधायक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज में स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है.
छह महीने तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए आवश्यक, विशेषज्ञों ने दिए कई सुझाव
मुख्य अतिथि डॉ. रमन किशोर ने बताया कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान (कलोस्ट्रम) कराना तथा शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) देना बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है.
संगोष्ठी में विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कुदरती सुरक्षा: डॉ. सौमेंदु मुखर्जी ने बताया कि मां के दूध में 87 प्रतिशत जल और कुदरती एंटीबॉडीज़ होते हैं, जो बच्चे की किडनी और रोग प्रतिरोधक क्षमता की रक्षा करते हैं.
- स्तनपान की सही तकनीक: डॉ. स्मिता झा ने सही पोज़िशन से स्तनपान कराने की विधियां बताईं.
- पूरक आहार: डॉ. अनिमेष इंदु ने छह महीने बाद सही तरीके से पूरक आहार (वीनिंग) शुरू करने की जानकारी दी.
- भ्रांतियों का खंडन: डॉ. निशांत कुमार के संचालन में हुए पैनल डिस्कशन में नवजात को घुट्टी या शहद देने जैसी पुरानी कुरीतियों को खारिज किया गया.
आईएपी समस्तीपुर के अध्यक्ष डॉ. एके साहू ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताया और सचिव डॉ. नीलेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.
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