बाहर सौ में बना सिपाही फर्जी सिपाही. गांव में दिखाता था धौंस

Published at :23 Jan 2017 4:19 AM (IST)
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बाहर सौ में बना सिपाही फर्जी सिपाही. गांव में दिखाता था धौंस

समस्तीपुर : 12 सौ रुपये खर्च कर वह सिपाही बन गया और गांव में धौंस जमाने लगा. यहां तक कि सिपाही के नाम पर उसके घर वालों ने पांच लाख रुपये दहेज पर उसकी शादी भी तय कर दी थी. लेकिन खरमास के कारण उसकी शादी नहीं हो पायी थी. राशि भुगतान के बाद मार्च […]

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समस्तीपुर : 12 सौ रुपये खर्च कर वह सिपाही बन गया और गांव में धौंस जमाने लगा. यहां तक कि सिपाही के नाम पर उसके घर वालों ने पांच लाख रुपये दहेज पर उसकी शादी भी तय कर दी थी. लेकिन खरमास के कारण उसकी शादी नहीं हो पायी थी. राशि भुगतान के बाद मार्च महीने में शादी होनी थी. बात शनिवार रात सहरसा-समस्तीपुर सवारी गाड़ी में आरपीएफ के हाथों गिरफ्तार फर्जी सिपाही विजय कुमार यादव की हो रही है. देर रात तक आरपीएफ के सहायक मंडल सुरक्षा आयुक्त अजय कुमार के नेतृत्व में चली गहन

पूछताछ के बाद आरपीएफ ने विजय को जीआरपी के हवाले कर दिया. जीआरपी ने प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है. आरपीएफ की पूछताछ में जो बात उभर कर सामने आयी है, वह चौंकाने वाली है. आरपीएफ इंस्पेक्टर एन मांझी बताते हैं कि विजय ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह दो वर्ष पूर्व दरभंगा के गोल्डेन टेलर में 11 सौ रुपये में पुलिस की वर्दी खरीदी थी.

वर्दी खरीदने के बाद उसने एक मित्र के सहयोग से मुजफ्फरपुर के एक नेट ढावा में सौ रुपये देकर नकली सिपाही की आइकार्ड बनवाया. उसके बाद गांव में अक्सर वह वर्दी पहन कर घूमने लगा. यदा कदा वह ट्रेनों में भी सफर के दौरान यात्रियों को वर्दी का धौंस दिखाता था. इसमें उसके द्वारा तसीली भी की जाती थी.
सिपाही के नाम पर तय हुई थी पांच लाख रुपये में शादी : आरपीएफ द्वारा गिरफ्तार विजय ने पूछताछ के दौरान बताया कि सिपाही होने के कारण ही उसकी शादी पांच लाख रुपये में तय हुई है. अगर वह जेल चला गया तो उसकी शादी टूट जायेगी. खरमास के कारण लड़की वालों ने दहेज की राशि जमा नहीं की है. इसके कारण अभी शादी नहीं हो पायी है. दहेज की राशि मिलने के बाद मार्च महीने में शादी होनी थी.
सौ रुपये में बनवाया था आइकार्ड
बीआरबी कॉलेज में इंटर का है छात्र
पूछताछ के दौरान विजय ने बताया कि वह शहर के भूईधारा के पास किराये के मकान में रहता है. वह शहर के बीआरबी कॉलेज का इंटर का छात्र है. जीआरपी थाने पर विजय के गांव माहे सिंघिया के भूसना के कुछ ग्रामीणों ने बताया कि विजय गांव में भी वर्दी पहन कर घूमता रहता था. इससे लोगों को लगने लगा था कि इसकी बिहार पुलिस में बहाली हुई है.
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