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जिले में लक्षित 18700 किसानाें में 6240 किसानों को मिला मृदा स्वास्थ्य कार्ड

Updated at : 06 Nov 2024 11:09 PM (IST)
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जिले में लक्षित 18700 किसानाें में 6240 किसानों को मिला मृदा स्वास्थ्य कार्ड

जिले में लक्षित 18700 किसानों में से 6240 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया गया है. शेष को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है.

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समस्तीपुर : जिले में लक्षित 18700 किसानों में से 6240 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया गया है. शेष को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है. कृषि विभाग किसानों को लगातार मिट्टी जांच के लिए प्रेरित कर रही है. जिले में लक्षित 18700 किसानों में से 17265 किसानों के खेतों से जांच के लिए मिट्टी के नमूने को संग्रहित किया गया है. इसमें 7249 मिट्टी के नमूने की जांच हुई है. 6555 मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया गया है. वहीं, 6240 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा दिया गया है. पटोरी प्रखंड में 757, मोहनपुर प्रखंड में 595, बिथान प्रखंड में 703, सिंघिया प्रखंड में 757, दलसिंहसराय प्रखंड में 757, मोरवा प्रखंड में 973, विभूतिपुर प्रखंड में 1567, रोसड़ा प्रखंड में 865, विद्यापतिनगर प्रखंड में 757, उजियारपुर प्रखंड में 1513, सरायरंजन प्रखंड में 865, समस्तीपुर प्रखंड में 757, वारिसनगर प्रखंड में 973, खानपुर प्रखंड में 1027, मोहिउद्दीननगर प्रखंड में 919, हसनपुर प्रखंड में 1078, शिवाजीनगर प्रखंड में 919, कल्याणपुर प्रखंड में 1567, ताजपुर प्रखंड में 649 तथा पूसा प्रखंड में 703 किसानों को मिट्टी जांच कर मृदा कार्ड बनाने का लक्ष्य है. इसमें से पटोरी प्रखंड में 118, मोहनपुर प्रखंड में 167, बिथान प्रखंड में 247, सिंघिया प्रखंड में 247, दलसिंहसराय प्रखंड में 255, मोरवा प्रखंड में 210, विभूतिपुर प्रखंड में 220, रोसड़ा प्रखंड में 160, विद्यापतिनगर प्रखंड में 147, उजियारपुर प्रखंड में 334, सरायरंजन प्रखंड में 525, समस्तीपुर प्रखंड में 244, वारिसनगर प्रखंड में 214, खानपुर प्रखंड में 875, मोहिउद्दीननगर प्रखंड में 215, हसनपुर प्रखंड में 1081, शिवाजीनगर प्रखंड में 207, कल्याणपुर प्रखंड में 270, ताजपुर प्रखंड में 251 तथा पूसा प्रखंड में 253 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर दिया जा चुका है.

क्या हैं फायदे

वैज्ञानिकों की माने तो किसानों के लिए मिट्टी जांच कराना बेहद जरूरी है. इसके कई फायदे हैं. सबसे पहले तो उर्वरक पर होने वाले अनावश्यक व्यय नहीं करना होता है. मिट्टी की जांच के बाद पता चल जाता है कि मिट्टी के लिए कौन सी जरूरी तत्वों की आवश्यकता है. किसान उसी हिसाब से उर्वरक का प्रयोग करेंगे. मिट्टी की जांच में मिट्टी के नमूने की रासायनिक जांच होती है. इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा का पता चलता है और यह पता चलता है कि मिट्टी में किस तत्व की कमी है. मिट्टी की उर्वरकता का पता चलता है. मिट्टी की जांच से मिट्टी में मौजूद प्रदूषकों का पता चलता है. मौजूद भारी धातुओं का भी पता चलता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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