चली गयी घर की लक्ष्मी, कैसे होगी बच्चों की परवरिश
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :28 Jun 2015 7:19 AM
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मोरवा : जिस बात का अंदेशा लोगों को था वही उसके सामने घट गया. जेसीबी से खुदे गड्ढे ने मां बेटी की जान ले ली. बता दें कि विगत डेढ़ सालों में जेसीबी से खुदे गड्ढे में डूबने से अब तक प्रखंड क्षेत्र में 16 लोगों की मौत हो चुकी है. बावजूद इसके प्रशासन चेतने […]
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मोरवा : जिस बात का अंदेशा लोगों को था वही उसके सामने घट गया. जेसीबी से खुदे गड्ढे ने मां बेटी की जान ले ली. बता दें कि विगत डेढ़ सालों में जेसीबी से खुदे गड्ढे में डूबने से अब तक प्रखंड क्षेत्र में 16 लोगों की मौत हो चुकी है. बावजूद इसके प्रशासन चेतने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार को धर्मपुर बान्दे में हुये घटना के पीछे जेसीबी से खुदा गड्ढा ही बताया जा रहा है.
लोग बताते हैं कि इस बही चौर में दर्जनों ऐसे गड्ढे हैं जिसकी गहराई 15 से 20 फीट है. लोग मिट्टी काटने के बाद इससे निश्चिंत हो जाते हैं. उन्हे शायद यह नहीं मालूम होता है कि दुर्घटना तो किसी के साथ हो सकती है.
बताया जाता है कि अन्य दिनों की भांति दोनों मां बेटी भैंस को चराने उस चौर की तरफ चली गयी थी. भैंस को नहाने के क्रम में उसे गहराई का अंदाज नहीं रहा और वह गहरे पानी में धंसती चली गयी. लोगों को जब तक इसकी जानकारी मिलती वह दोनों मां बेटी असमय काल के गाल में समा चुकी थी.
परिजन बताते हैं कि मृतका घर की लक्ष्मी थी. उसी के सहारे घर की सारी गृहस्थी चल रही थी. घर का सारा काम निबटाने के बाद वह मवेशी के चारा का भी प्रबंध करती और मवेशी को नहाना धुलाना उसी के जिम्मे था. मृतका का पति अमरेंद्र सिंह मेहनत मजदूरी कर घर की जिम्मेवारी निभाता. छोटी बेटी बुधनी और बेटा गोलू की किलकारी जब घरों में गूंजती तो घर के लोग सारी गरीबी को भूल बच्चों में ही मशगूल हो जाते.
मां के शव से लिपट कर रो रहे नन्हे गोलू की करुण क्रंदन से पत्थर का कलेजा भी पानी पानी हो रहा था. पूर्व पंचायत समिति सदस्य चंदेश्वर सिंह किसी तरह अपने बेटे और पोते पोतियों को ढांढस बंधाने का प्रयास करते लेकिन उनका सब्र खुद ही जवाब दे रहा है और सबसे लिपट कर खुद ही रोने लगते. सबका यही कहना है कि एक तो गरीबी और उपर से प्रकृति की यह मार परिवार के लोग कैसे सहन कर पायेंगे. मृतका के पति का कलेजा यह सोच सोचकर फटा जा रहा है कि अब कैसे होगी परिवार की परवरिश. कौन खिलायेगा बच्चों को खाना.
दरवाजे पर बंधा भैंस भी शायद यही महसूस कर रहा होगा अब तो घर की गृहस्थी ही चौपट हो गयी इस बेजुबान को रोज पोखरे तक पहुंचाकर नहाने धुलाने की हिम्मत कोन करेगा. ग्रामीणों का कहना है कि जो होनी थी सो तो हो गयी अब अगला कोई जेसीबी से खुदे गड्ढे का शिकार न हो इसके लिये प्रशासन को कुछ उपाय अविलंब करना होगा.
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