ठहाकों से गूंजता रहा पटेल मैदान, लोटपोट हुए लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Mar 2015 6:29 AM (IST)
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समस्तीपुर : मंगलवार की संध्या को शहर की हर राह पटेल मैदान की ओर मुड़ने लगी. कविता के शौकीन बूढे, बच्चे, नौजवानों की अलग अलग टोली. महिलाएं भी टोली बनाकर पहुंच रही थी. सभी का सफर प्रभात खबर कवि सम्मेलन पंडाल सीधा में जाकर खत्म होता है. सभी के चेहरे पर मुस्कान. वे उत्साहित थे. […]
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समस्तीपुर : मंगलवार की संध्या को शहर की हर राह पटेल मैदान की ओर मुड़ने लगी. कविता के शौकीन बूढे, बच्चे, नौजवानों की अलग अलग टोली. महिलाएं भी टोली बनाकर पहुंच रही थी. सभी का सफर प्रभात खबर कवि सम्मेलन पंडाल सीधा में जाकर खत्म होता है. सभी के चेहरे पर मुस्कान. वे उत्साहित थे. कोई हंसी का आनंद उठाने के लिए आये तो कोई कवियों के एक एक शब्द का रसास्वादन के लिए पहुंचे.
प्रभात खबर द्वारा आयोजित विराट हास्य कवि सम्मेलन का मंच भी पूरी तरह तैयार था.कवियों का आगमन हुआ. इसी बीच मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य लोगों का भी पदार्पण होता है.
जोरदार तालियों से लोगों स्वागत किया. सबके चेहरे पर खुशी के भाव दिख रहे थे. खुशी इस बात की कि उन्हें देश के नामी गिरामी हास्य व्यंग के कवियों की कविताएं सुनने को मिलेगा. यहां के लिए यह लाजिमी भी है. समस्तीपुर की धरती शुरू से ही साहित्यक रूप से समृद्ध रही है. पंडित सुरेन्द्र झा सुमन हो या फिर महाकवि आरसी प्रसाद सिंह, चंद्रकांता के लेखक बाबू देवकीनंदन खत्री हों या फिर अरुण रामायण के रचयिता पद्मश्री पोद्दार रामावतार अरुण. डॉ हरिवंश तरुण सरीखे कवि भी समस्तीपुर के रहे हैं.
मैथिली कवि गौरी कांत चौधरी कांत या फिर मार्केण्डेय प्रवासी जिन्होंने अपनी रचनाओं से देश का ध्यान खींचने का काम किया है. साहित्यकारों की धरती समस्तीपुर में देश के विभिन्न कोने से आये कवि साहित्यकारों का जबरदस्त स्वागत होता है. कवियों के मुख से निकलने वाले एक एक शब्द पर लोग लोट पोट होते रहे. क्या बूढा, क्या जवान. महिलाएं एवं बच्चे भी तालियों से आये कवियों का स्वागत करते नहीं थक रहे थे.
कवि भी उत्साहित थे. वे भी पूरे मनोयोग से, उत्साह से लोगों को झकझोरते रहे. कोई हास्य व्यंग के तीर से लोगों के दिलों को गुदगुदी लगे तो कोई नेताओं पर शब्दों के तीर चलाकर वाहवाही लूटते रहे. कवयित्री भी इसमें भला कहां पीछे रहनेवाली थीं. श्रृंगार रस की कविताओं व गजल की पंक्तियों से खूब वाहवाही बटोरती रहीं. यह दौड़ देर रात चलता रहा. भीड़ छंटने का नाम नहीं ल रही थी. इच्छा है कि कुछ देर और चले, कुछ देर और चले..
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