सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा पाये बिना विकास बेमानी : नीतीश

Published at :17 Dec 2017 5:44 AM (IST)
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सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा पाये बिना विकास बेमानी : नीतीश

विकास समीक्षा यात्रा . शौचालय बनने से 90 फीसदी बीमारी पर रोक संभव समस्तीपुर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शराब, दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा पाये बगैर विकास का कोई मतलब नहीं है. उनकी सरकार इन कुरीतियों के खिलाफ जनजागृति लाकर सही मायने में प्रदेश का विकास कर […]

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विकास समीक्षा यात्रा . शौचालय बनने से 90 फीसदी बीमारी पर रोक संभव

समस्तीपुर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शराब, दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों से छुटकारा पाये बगैर विकास का कोई मतलब नहीं है. उनकी सरकार इन कुरीतियों के खिलाफ जनजागृति लाकर सही मायने में प्रदेश का विकास कर रही है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर पूरे देश में अभियान चल रहा है. सरकार ने लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की शुरुआत की है. इसके तहत हर घर में शौचालय बनवाने का लक्ष्य है. इससे 90 फीसदी बीमारियों को रोका जा सकता है. वह शनिवार को सरायरंजन प्रखंड के केदार संत रामाश्रय कॉलेज मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे.
सीएम ने कहा कि 2018 तक हर घर में बिजली और अगले चार सालों में हर घर में नल का जल पहुंचाना उनकी सरकार का निश्चय है. उन्होंने कहा कि हर आदमी का एक सपना होता है. मैं लोगों के उसी सपने को पूरा करने में जुटा हूं.
शराबबंदी की चर्चा करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे फर्क पड़ा है. अब चौक चौराहों पर मजमा लगना बंद हो गया है. घर की बहू- बेटी देर रात तक सड़कों पर बेझिझक आ जा रही है. सरकार पूर्ण नशाबंदी की ओर कदम बढ़ा रही है. इसके लिये सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं चलेगा. लोगों को खासकर महिलाओं को इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा.
सीएम ने स्वीकार किया कि शराबबंदी के बावजूद कुछ लोग अब भी इस धंधे में लिप्त हैं. रोहतास और वैशाली में जहरीली शराब पीने से मौत की घटना भी हुई है. इसमें कुछ सरकारी लोग भी लगे हैं, लेकिन उन पर भी अब शिकंजा कसा जा रहा है. हर गांव के बिजली के पोल पर टॉल फ्री नंबर लिखा गया है जिस पर फोन कर शराब के धंधे में शामिल लोगों की जानकारी दें. जानकारी देने वालों की पहचान गुप्त रखी जायेगी. इसके लिए मुख्यालय में अलग मॉनीटरिंग टीम बनायी जा रही है. उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि 21 जनवरी को शराबबंदी के खिलाफ आयोजित मानव शृंखला में जो उनके हाथ पकड़े खड़े थे, आज इसका विरोध कर रहे हैं.
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