समस्तीपुर में आइसीटी लैब की तैयारी शुरू, 76 स्कूलों में तीन माह में बनेंगे लैब, जाने क्या मिलेगा लाभ

Published at :31 Aug 2022 5:07 AM (IST)
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समस्तीपुर में आइसीटी लैब की तैयारी शुरू, 76 स्कूलों में तीन माह में बनेंगे लैब, जाने क्या मिलेगा लाभ

चयनित संस्था बच्चों को शिक्षा, शैक्षणिक जरूरतों के कार्य का लाभ ले सकेंगे आइसीटी योजना के लिए सर्वेक्षण का काम चल रहा है. प्रत्येक लैब में 10-10 कंप्यूटर सेट, प्रोजेक्टर व डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे. इस योजना के तहत जिले के 76 सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है.

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हाइस्कूल के साथ अब प्रारंभिक स्कूल के बच्चे भी अब स्मार्ट बनेंगे. प्रारंभिक कक्षा से बच्चे कंप्यूटर शिक्षा के ककहरे सीखेंगे. इसके लिए इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आइसीटी) योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक लैब पर 6.40 लाख खर्च करेगी. इस योजना के तहत जिले के 76 सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है. ऐसे चयनित स्कूलों में मॉडल कंप्यूटर लैब स्थापित किया जाएगा. ताकि बच्चे डिजिटली तकनीक की पूरी दक्षता स्कूल स्तर पर ही सीख सकें.

हर लैब में होंगे 10-10 कंप्यूटर सेट

चयनित संस्था बच्चों को शिक्षा, शैक्षणिक जरूरतों के कार्य का लाभ ले सकेंगे आइसीटी योजना के लिए सर्वेक्षण का काम चल रहा है. प्रत्येक लैब में 10-10 कंप्यूटर सेट, प्रोजेक्टर व डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे. इसके लिए केंद्र सरकार की इन्फाॅर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) योजना के तहत जिले के 76 स्कूलों को कंप्यूटर लैब स्थापित करने के लिए चयन किया गया है. निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को शुरुआती कक्षा से ही कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है. लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को 12वीं तक भी कंप्यूटर की शिक्षा नहीं मिल पाती है.

सूचना व संचार प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा मिलेगी

आईसीटी योजना के संचालन से अब स्कूली छात्र अपने स्कूल में ही तकनीकी शिक्षा हासिल कर सकेंगे. जिससे जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित होगा. जिले के चयनित छात्रों में आईसीटी लैब की स्थापना के बाद जहां स्कूली छात्र सूचना व संचार प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे. वहीं छात्र अपने स्कूल में ही ऑनलाइन फार्म भरने, एडमिट कार्ड डाउनलोड करने सहित तमाम शैक्षणिक जरूरतों के कार्य लाभ ले सकेंगे. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को डिजिटली दक्ष बनाने के अलावा सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों से आगे ले जाना. असल में अभिभावक डिजिटल तकनीक शिक्षा जैसे चकाचौंध देखकर अपने बच्चों का नामांकर निजी विद्यालय में कराना चाहते हैं, यदि सरकारी स्कूलों में भी शुरुआती दौर से ही बच्चों के हाथ में माउस थमा दी जाय तो अभिभावकों का झुकाव सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ेगा. साथ ही कम खर्च में शत प्रतिशत लोग शिक्षित व डिजिटली शिक्षित व साक्षर बन जाएंगे.

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