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नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार करने का लिया निर्णय

Updated at : 03 May 2024 8:38 PM (IST)
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नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार करने का लिया निर्णय

नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार करने का लिया निर्णय

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ग्रामीणों ने आक्रोशित लहजे में कहा, पुल नहीं तो वोट नहीं

सौरबाजार.लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में चुनाव होना है. ऐसे में लोग नेताओं द्वारा किए गये वादे से तंग आकर अब वोट बहिष्कार का मन बना रहा है. शुक्रवार को प्रखंड के सहुरिया पूर्वी पंचायत स्थित दुहबी गांव के सैकड़ों लोगों ने हाथ में पुल नहीं तो वोट नहीं, किसी भी पार्टी के नेताओं को इस गांव में आना मना है जैसे अन्य स्लोगन लिखे तख्तियां लेकर 7 मई को होने वाले चुनाव में मत बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. यहां के लोगों का सीधा कहना है कि हमारे गांव के बीचोंबीच बह रही बरसाती सोने नदी पर पुल निर्माण की मांग हमलोग लगभग 20 वर्षों से कर रहे हैं. लेकिन नेताओं द्वारा किए गए झूठे वादे से अब हमलोग उब चुके हैं और इस चुनाव में हमलोगाें ने मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है. यहां के लोगों का कहना है कि सौरबाजार से सहुरिया पूर्वी दुहबी होते हुए मधेपुरा जाने वाली महत्वपूर्ण मार्ग में दुहबी गांव के पास बरसाती सोने नदी पर पुल बनाने की मांग यहां के लोगों द्वारा वर्षों से की जा रही है. लेकिन आज तक कोई जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी इस पर ध्यान नहीं दिया है. निराश होकर यहां के लोगों ने इस बार के चुनाव में मतदान नहीं करने का मन बना लिया है. अब देखना होगा कि चुनाव लड़ने वाले नेता या मतदाता को जागरूक करने के लिए लगाये गये जिम्मेदार चुनाव आयोग का तंत्र इन लोगों को मतदान के लिए तैयार कर पाते हैं या नहीं. यहां के लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि जो पार्टी चुनाव के बाद पुल बनाने का लिखित रूप से बांड पेपर पर एग्रीमेंट करेगी, उसी को हमलोग वोट करेंगे. अन्यथा हमलोग किसी के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे. लगभग 5 हजार की आबादी वाले इस गांव के संतोष सादा, बलराम भगत, सुलेखा देवी, मिथिलेश कामत, सुशील मंडल, सियाराम सादा, नथन कामत, मुरारी यादव, हीरालाल, कुमोद कामत, सत्तो कामत, जयकृष्ण कामत, मीना देवी, मो मुन्ना आलम समेत सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के समय यह नदी पानी से लबालब भरा रहता है. ग्रामीणों के सहयोग से बनाये गये चचरी पुल के सहारे हमलोग आवाजाही करते हैं. गांव का विद्यालय भी नदी के उस पार रहने के कारण बर्षात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं. हर वर्ष यहां डूबने से लोगों की मौत हो रही है. कई बच्चे की भी विद्यालय आने जाने के क्रम में डूबने से मौत हो चुकी है. यहां पुल बन जाने से आसपास के दर्जनों गांवों और पंचायत के लोग लाभान्वित होंगे. मधेपुरा की दूरी मात्र 9 किलोमीटर होगी. जबकि अभी 25 से 30 किलोमीटर दूरी तय कर मधेपुरा जाना पड़ता है. नदी के दोनों छोर तक पक्की सड़क पहुंची हुई है. जो पूरब से आकर नदी तक और पश्चिम से आकर भी नदी तट तक पहुंच रही हैं.

फोटो – सहरसा 16 – दुहबी गांव में तख्तियां लेकर वोट बहिष्कार करने का निर्णय लेते लोग.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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