आंधी-तूफान ने मचायी तबाही, सात पंचायतों में भारी नुकसान

प्रखंड क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने व्यापक तबाही मचा दी है. तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर टाट-फूस एवं एस्बेस्टस की चादरें उड़ गयी.
गोल्डेन क्रॉप मक्का की फसल बर्बाद
लगातार तीन दिनों की बारिश से हालात बदहाल
बनमा ईटहरी. प्रखंड क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने व्यापक तबाही मचा दी है. तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर टाट-फूस एवं एस्बेस्टस की चादरें उड़ गयी. लालपुर चिमनी स्थित सूरज झा के डिपो का चदरा भी तेज आंधी में उड़ गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है.
सात पंचायतों में सबसे अधिक असर
आंधी और बारिश का सबसे अधिक प्रभाव घौरदौड़, ईटहरी, महारस, सरबेला, जमालनगर, रसलपुर एवं सहुरिया पंचायतों में देखा गया है. कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. मुख्य सड़कों पर रेनकट जैसी स्थिति बन गयी है, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है. ग्रामीण सड़कों पर कीचड़ और पानी भर जाने के कारण लोगों को आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कई इलाकों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है.
मक्का किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान
लगातार हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. विशेष रूप से किसानों की नकदी फसल और गोल्डेन क्रॉप कही जाने वाली मक्का की फसल को भारी क्षति पहुंची है. खेतों में पानी भर जाने से तैयार फसल बर्बाद होने लगी है. किसानों का कहना है कि इस बार मक्का की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन असमय बारिश और तेज हवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. कई किसानों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है.
बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित
खराब मौसम का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा है. कई इलाकों में घंटों बिजली सेवा बाधित रही. तेज हवा और बारिश के कारण विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गयी, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ा. लगातार बारिश के कारण आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. लोग घरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है. खराब मौसम के चलते दैनिक कार्यों पर भी असर पड़ा है.
मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर क्षति का आकलन कराने तथा फसल नुकसान झेल रहे किसानों एवं प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा देने की मांग की है. लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी सहायता जरूरी है.
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लेखक के बारे में
By दीपांकर श्रीवास्तव
दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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