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पहली बार पाश्चात्य शिक्षा नीति से अलग हुई हमारी शिक्षा नीति : कुलपति

Updated at : 17 Dec 2025 5:50 PM (IST)
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पहली बार पाश्चात्य शिक्षा नीति से अलग हुई हमारी शिक्षा नीति : कुलपति

इंडियन नॉलेज सिस्टम, रिवाइवल ऑफ भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया.

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आरएम कॉलेज में रिवाइवल ऑफ भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर हुआ एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार

सहरसा. राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय के शिक्षा संकाय एवं आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को इंडियन नॉलेज सिस्टम, रिवाइवल ऑफ भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ बिमलेंदु शेखर झा, विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो डॉ अशोक कुमार ठाकुर, प्रधानाचार्य प्रो डॉ गुलरेज रौशन रहमान, आयोजन सचिव डॉ ललित नारायण मिश्र के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. शैक्षिक सत्र में बीज वक्ता डॉ अरविंद कुमार मिलन, विभागाध्यक्ष डीडीई डॉ ललित नारायण मिश्र, मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा एवं संसाधन विशेषज्ञ के रूप में चार अन्य वक्ताओं में जेडएचटीटी कॉलेज दरभंगा से विभागाध्यक्ष प्रो डॉ एमए हासमी, इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ मिर्जा निहाल अहमद बेग एवं बीएनएमयू मधेपुरा के शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो डॉ सुरेंद्र कुमार ने अपने विचार प्रस्तुत किये.

कुलपति डॉ विमलेन्दु शेखर झा ने कहा कि नयी शिक्षा नीति भारत की पहली ऐसी शिक्षा नीति है जो इनकी अपनी है. हमें शिक्षा नीति पहली बार पाश्चात्य शिक्षा नीति से अलग हुई है. उन्होंने प्रशाल में लगे ज्योतिबा फुले, विवेकानंद, चरक, सुश्रुत, चाणक्य के तैलीय चित्रों के साथ कोसी क्षेत्र के पंडित मंडल मिश्रा, विदूषी भारती, संत लक्ष्मीनाथ गोसाई, कारू खिरहरी के योगदानों को याद कर उनके तैलीय चित्रों को लगाने की भी उपयोगिता पर ध्यान दिलाया. डॉ गुलरेज रहमान ने कहा कि हमारी प्राचीन शिक्षा में हमारे विज्ञान, औद्योगिकी, प्राद्यौगिकी, जीवन-मूल्य के तत्व मौजूद हैं. डॉ अरविंद ने कहा कि प्राचीन ज्ञान परंपरा में सुनिश्चित शिक्षक छात्र संबंध को आधुनिक समय में भी अपनाने की जरूरत है. डॉ हासमी ने कहा कि हमने लंबे समय में शिक्षा के बड़े मूल्यों को खो दिया है. जिन्हें पुन: प्राप्त करने की जरूरत है. डॉ अहमद बेग ने कहा कि हमें अपनी प्राचीन प्रथाओं, परंपराओं एवं संस्थाओं को अपने पाठ्यक्रम व शिक्षा नीति से समायोजित करना है. डॉ सुरेंद्र ने कहा कि हमारी नयी शिक्षा नीति में प्राचीन ज्ञान परंपरा के साथ जोड़ने के लिए अभी भी बहुत कुछ करना है. मंच से प्राचार्य डॉ गुलरेज रौशन रहमान की पुस्तक एक्सप्लोरिंग ह्यूमेनिज्म इन ग्राहम ग्रीनीज फीक्सन, एलिमैंट्स आफ नेचुरलिज्म एंडज्ञफेटलिज्म इन द वेसेक्स नॉवेल आफ थॉमस हार्डी, रिवाइजिंग डिकेंसेस सोसल कॉमेंटरी इन हिज सेलेक्टेड नॉवल का विमोचन किया गया.

इस अवसर पर डॉ राजीव, डॉ अरुण, डॉ आशुतोष, डॉ उर्मिला, डॉ इंद्रकांत, सुशील कुमार झा, डॉ कविता कुमारी, डॉ आलोक कुमार झा, डॉ अमिष, डॉ प्रतिभा, डॉ संजय, डॉ सुमंत राव, डॉ पिंकी, डॉ अपर्णा, डॉ संजीव, डॉ गोपाल, डॉ भगवती, डॉ किरण, डॉ मंसूर, डॉ अरुण, डॉ रामावधेश, डॉ असरारूल, नंदकिशोर झा, रणधीर मिश्रा, हिफाजत, सौहराब, उदय तिवारी, हैदर, सुमित, सुधाकांत, प्रमोद सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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