सहरसा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ी आस्था की भीड़, साध्वी पद्महस्ता भारती बोलीं- सद्गुरु अज्ञान के अंधकार से आत्मबोध की ओर ले जाते हैं

गुरु पूजन करते साधु संत एवं उमरी श्रद्धालुओं की भीड़ | Prabhat Khabar Network
Saharsa News: सत्तरकटैया में गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. साध्वी पद्महस्ता भारती ने कहा कि सद्गुरु ही जीव को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकालते हैं.
Saharsa News: सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड स्थित पदमपुर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया. दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की बिहार-झारखंड शाखा द्वारा आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया.
कार्यक्रम के दौरान साध्वी पद्महस्ता भारती ने गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सद्गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि वह दिव्य शक्ति हैं जो जीव को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर आत्मबोध और परमात्मा की अनुभूति तक पहुंचाते हैं. उनके प्रवचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन और आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया.
गुरु ही आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं
सत्संग को संबोधित करते हुए आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी पद्महस्ता भारती ने कहा कि जीवन की वास्तविक सफलता गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण में निहित है.
उन्होंने कहा कि गुरु का मार्ग व्यक्ति को केवल सांसारिक ज्ञान नहीं देता, बल्कि आत्मबोध और परमात्मा के दर्शन की दिशा में आगे बढ़ाता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने तथा समाज में नैतिकता और सद्भाव का संदेश फैलाने का आह्वान किया.
स्वामी कुंदनानंद ने बताया गुरु धर्म का महत्व
कार्यक्रम में स्वामी कुंदनानंद ने कहा कि गुरु का बताया हुआ मार्ग ही मोक्ष का मार्ग है.
उन्होंने कहा कि यदि धरती को वैकुंठ बनाना है तो गुरु धर्म का पालन आवश्यक है. उनके अनुसार ज्ञान का मार्ग ही कल्याण का मार्ग है और जब कोई साधक सच्चे अर्थों में शिष्य बनता है, तब उसके जीवन का वास्तविक परिवर्तन शुरू होता है.
उन्होंने यह भी कहा कि गुरु पूजा की परंपरा महर्षि वेदव्यास से प्रारंभ हुई और गुरु के गुण अनंत हैं. गुरु की पूजा से सभी देवी-देवताओं की पूजा का फल प्राप्त होता है तथा जीवन को उत्सवमय बनाने के लिए पूर्ण गुरु की शरण आवश्यक है.
भव्य सत्संग और विशाल भंडारे का आयोजन
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान भव्य सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना का आयोजन किया गया.
इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया. आयोजन में अनुशासन, सेवा भावना और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की विशेष सराहना की गई. संस्थान के स्वयंसेवकों और सेवादारों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
स्वास्थ्य जांच शिविर और नशा उन्मूलन अभियान भी चला
महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ सामाजिक सरोकारों को भी जोड़ा गया.
संस्थान की ओर से बोध नशा उन्मूलन अभियान और आरोग्य प्रकल्प के तहत विशाल स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया. श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य जांच सुविधा का लाभ उठाया और नशा मुक्त समाज के संदेश को भी व्यापक रूप से साझा किया गया.
Saharsa News: विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना
कार्यक्रम के समापन पर मानव कल्याण, विश्व शांति और आध्यात्मिक जागरण के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई.
इस अवसर पर बिहार-झारखंड प्रभारी स्वामी यादवेंद्रानंद, स्वामी कपिलदेवानंद, स्वामी सुकर्मानंद, स्वामी कुंदनानंद, स्वामी सांसदानंद, स्वामी धनंजयानंद, संजय कुमार सिंह, अजीत कुमार सहित अनेक संत, स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित रहे.
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम न केवल धार्मिक चेतना को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सेवा, संस्कार और सामुदायिक एकता की भावना को भी बढ़ावा देते हैं.
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लेखक के बारे में
By लालबहादुर कुमार
पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. प्रिंट मिडिया में वर्ष 2012 से लगातार कार्यरत हैं. वर्तमान में मैं सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में समाचार संकलन के कार्य में जुटे हैं.उनकी रूचि शिक्षा एवं समाज सेवा है.
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