सहरसा के मैथिली साहित्यकार मुंबई में कर रहे परिचर्चा

सहरसा के मैथिली साहित्यकार मुंबई में कर रहे परिचर्चा
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में तीन दिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ शुभारंभतीन दिनों तक मैथिली भाषा व साहित्य पर होगा गंभीर चिंतन व मंथन सहरसा .देश की आर्थिक राजधानी व मायानगरी मुंबई में शुक्रवार को शुभ सीता फाउंडेशन द्वारा तीन दिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन किया गया. जिसमें सहरसा व सुपौल सहित कई जिले के साहित्यकार शामिल हुए. समारोह में कार्यक्रम संयोजिका मनोरमा झा, साहित्यकार विनोदानंद झा, अरविंद कुमार अक्कू, प्रो विद्यानंद झा, प्रो कमलानंद झा, तारानंद वियोगी, विभा रानी, कार्तिकेय मैथिल, विनोद कुमार झा सहित अनेकों मैथिली भाषा सेवी व साहित्यकार मौजूद रहे. औपचारिक उद्घाटन से पहले पिछले तीन वर्षों में दिवंगत हुए मैथिली साहित्यकार को मोन पाड़य छी सत्र में उनके कृतित्व पर चर्चा कर श्रद्धांजलि दी गई. श्रद्धांजलि देने वाले में केदार कानन, विभा रानी, अरुणाभ सौरभ, तारानंद वियोगी, चंद्रेश शामिल थे. कार्यक्रम के दौरान मैथिली साहित्य में एआई के प्रभाव के संदर्भ लेखन, अनुवाद व प्रकाशन विषय पर वक्ता प्रदीप बिहारी, कार्तिकेय मैथिल, मनीष ठाकुर, कुमार विक्रमादित्य, राजेंद्र झा एवं संचालक भास्करानंद झा ने अपने विचार व्यक्त कर अमूल्य सुझाव दिए. तीन दिनों तक मैथिली भाषा व साहित्य पर गंभीर चिंतन एवं मंथन में देश विदेश के एक सौ से अधिक मैथिली साहित्यकारों का जमावड़ा देश की आर्थिक राजधानी में हुआ है. इस अवसर पर सहरसा से कुमार विक्रमादित्य, अमित आनंद, किसलय कृष्ण, संजीव कश्यप, नेपाल से प्रवीण नारायण चौधरी, मधुबनी से अक्षय आनंद, रेखा सिंह, कुणाल ठाकुर, सुपौल से दीपिका चन्द्रा सहित अन्य साहित्यकारों ने भाग लिया.
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