तेलहन उत्पादन को प्राथमिकता देने व मिलने वाले रोजगार की दी गयी जानकारी

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तेलहन उत्पादन को प्राथमिकता देने व मिलने वाले रोजगार की दी गयी जानकारी

तेलहन उत्पादन को प्राथमिकता देने व मिलने वाले रोजगार की दी गयी जानकारी

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राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न सहरसा. जिला स्तरीय राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन प्रशिक्षण का दो दिवसीय आयोजन सोमवार को ई किसान भवन कहरा में किया गया. कार्यक्रम जिला कृषि पदाधिकारी सह सदस्य सचिव राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन संजय कुमार की अध्यक्षता में किया गया. प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सिमरी बख्तियारपुर मो कौशीन अख्तर, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सदर, परामर्शी डॉ मनोज सिंह, प्रखंड कृषि पदाधिकारी कहरा मनीष कुमार, भीसीपी संजीव कुमार व प्रखंड स्तरीय सभी कृषि समन्वयक, एटीएम, बीटीएम व किसान सलाहकार की उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर किया गया. जिला कृषि पदाधिकारी ने विभाग द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देते तेलहन उत्पादन को प्राथमिकता देने एवं इससे भविष्य में मिलने वाले रोजगार की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए इच्छुक किसान, एफपीओ के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गये हैं. 10 टन क्षमता की इकाई स्थापित करने के लिए 9.90 लाख रुपये प्रति इकाई का अनुदान या प्रोजेक्ट लागत का 33 प्रतिशत अनुदान किसानों को मिलेगा. जिले में कुल दो लक्ष्य है. आवेदकों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जायेगा. अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने तेल-तेलहन के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया. जिसमें ठंडी जलवायु, दोमट या काली मिट्टी सिंचित अवस्था में अक्सर अक्तूबर माह में ही बुआई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भूमि की गहरी जुताई खेत समतल करें. जैविक खाद एवं जैव फफूंदनाशी बुआई के पहले बीज का उपचार आवश्यक रूप से करना चाहिए. पहली सिंचाई बुआई से 25 से 30 दिन, दूसरी 60 से 70 दिन पर करनी चाहिए. सरसों के खेत में माहो कीट का प्रकोप अधिक होता है. इसके लिए इमीडाक्लोपीड का छिड़काव ससमय करें. वेल्यू चेन पार्टनर संजीव कुमार, प्र सिमरी बख्तियारपुर एग्रो प्रोड्क्ट कंपनी लिमिटेड द्वारा एफपीओ के गठन एवं किसानों के उत्पाद खरीद बिक्री के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी. उनके द्वारा तेलहन की खेती से किसानों की आय में वृद्धि एवं खेतों में अधिक उत्पादन के संबंध में जानकारी दी गयी. जिला परामर्शी डॉ मनोज सिंह ने तेल-तेलहन मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार करते इससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्रशिक्षण के समाप्ति की घोषणा की गयी.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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