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इतिहास लेखन तटस्थ भाव से करना चाहिए ना कि किसी पूर्वाग्रह के साथः प्राचार्य

Updated at : 15 Dec 2025 6:16 PM (IST)
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इतिहास लेखन तटस्थ भाव से करना चाहिए ना कि किसी पूर्वाग्रह के साथः प्राचार्य

इतिहास लेखन तटस्थ भाव से करना चाहिए ना कि किसी पूर्वाग्रह के साथः प्राचार्य

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एमएलटी कॉलेज में इतिहास लेखन व महात्मा गांधी के विचार विषय पर हुआ सेमिनार सहरसा . एमएलटी कॉलेज के इतिहास विभाग में इतिहास लेखन व महात्मा गांधी के विचार विषय पर सोमवार को सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो डॉ सुधीर कुमार सिंह ने की. अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि इतिहास लेखन तटस्थ भाव से करना चाहिए ना कि किसी पूर्वाग्रह के साथ. कार्यक्रम में एमए के छात्र -छात्राएं व मौजूद प्राध्यापकों ने अपने विचार व्यक्त किये. वक्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों एवं व्यक्तित्व की ऐतिहासिक प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किया. आयोजन में इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ कोमल वर्मा ने छात्रों को गांधी के मूल्यों को जीवन में उतारने पर जोर दिया. डॉ सतीश कुमार ने चंपारण आंदोलन में गांधी की भूमिका पर प्रकाश डाला. डॉ राजेश कुमार के अलावा राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ हर्षवर्धन ने अपने वक्तव्य में कहा कि गांधी का भारत सहिष्णु होगा. गांधी ने ऐसे भारत की परिकल्पना की थी जिसमें स्वयं गांधी की भी आलोचना की जा सके. दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष कुमारी अभिलाषा, डॉ कुमार देव दत्त ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में रामबच्चन सिंह, स्वतंत्र कुमार झा, स्वीटी कुमारी, श्वेता, संदीप, संजीव, साक्षी, अमित राज, क़ैसर अली, अजित आनंद, कौशिक, काजल, निशा, सिमरन सहित अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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