सहरसा के चैनपुर मां काली मंदिर में उमड़ती है भारी भीड़: नवरात्र और अमावस्या पर दिखता है भव्य नजारा

चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर | Prabhat Khabar Network
चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर अपनी अलौकिक शांति और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. यहां सच्चे मन से आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है, जिससे यह क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
हालांकि अब यहां दो काली मंदिर स्थापित हो चुके हैं, लेकिन वर्षों पुराना यह प्राचीन मंदिर आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था का मुख्य केंद्र है. ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. आम दिनों के अलावा नवरात्र, विशेष अमावस्या और काली पूजा के अवसर पर यहां सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
अद्भुत शांति का अनुभव और प्राचीन शक्ति साधना की परंपरा
चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर अपनी खास धार्मिक महत्ता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए दूर-दराज तक प्रसिद्ध है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को एक अलौकिक शांति और भक्ति की अनुभूति होती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर वर्षों पुराना है जहां प्राचीन काल से चली आ रही विशेष विधि-विधान और परंपराओं के अनुसार मां काली की पूजा-अर्चना की जाती है. प्रतिदिन सुबह और शाम को होने वाली विशेष महाआरती में बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी श्रद्धालु शामिल होकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
नवरात्र और दीपावली में उमड़ता है आस्था का सैलाब
विशेष धार्मिक अवसरों पर इस ऐतिहासिक मंदिर का नजारा देखने लायक होता है. नवरात्र, काली पूजा और हर महीने पड़ने वाली अमावस्या पर यहां का पूरा माहौल वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और घंटों की गूंज से भक्तिमय हो जाता है. इन विशेष अवसरों पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया जाता है. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा यहां बलि प्रदान करने की भी प्राचीन परंपरा है; खासकर दीपावली (काली पूजा) के समय यहां सैकड़ों की संख्या में छाग (बकरे) की बलि दी जाती है.
पर्यटन और आध्यात्मिक विकास का मुख्य केंद्र
धार्मिक महत्ता के साथ-साथ यह परिसर अब स्थानीय पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण होता जा रहा है. हाल के वर्षों में मंदिर समिति और स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं की सुविधा तथा साफ-सफाई को लेकर कई बड़े बदलाव और विकास कार्य किए गए हैं. शाम के समय मंदिर की आकर्षक लाइटिंग और शांत वातावरण यहां आने वाले दर्शनार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है. स्थानीय निवासियों का दृढ़ विश्वास है कि मां काली के इस जागृत दरबार से आज तक कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटा है.
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