प्रशासन कर रहा बरसात में लोगों को डुबोने की तैयारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 May 2017 5:19 AM (IST)
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लापरवाही. आधा मई भी बीता, नहीं निकला ड्रेनेज सिस्टम का टेंडर मॉनसून से पहली प्री-मॉनसून की बारिश में ही शहर में कई जगह जलजमाव हो रहा है. पिछली बरसात को याद कर लोग कांप जाते हैं, जब पानी लोगों के घर तक घुस गया है. ऐसे में पैसे मिलने के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम का […]
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लापरवाही. आधा मई भी बीता, नहीं निकला ड्रेनेज सिस्टम का टेंडर
मॉनसून से पहली प्री-मॉनसून की बारिश में ही शहर में कई जगह जलजमाव हो रहा है. पिछली बरसात को याद कर लोग कांप जाते हैं, जब पानी लोगों के घर तक घुस गया है. ऐसे में पैसे मिलने के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम का टेंडर न होना प्रशासनिक लापरवाही को दरसाता है.
सहरसा : डीएम बिनोद सिंह गुंजियाल के प्रयास से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन माह पूर्व ही शहर से पानी निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम को स्वीकृति दे दी थी.
बिहार अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने सहरसा आ प्रस्तावित योजना का मुआयना व स्थल निरीक्षण भी किया. कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने नगर परिषद को 54 लाख रुपये भी आवंटित कर दिये. अप्रैल माह में टेंडर निकलना था और मई माह में काम को शुरू हो जाना था, लेकिन पूरे अप्रैल के बाद आधे से अधिक मई भी गुजर गया. न तो टेंडर का कोई पता है और न ही काम का.
डराने लगा है प्री-मॉनसून: मानसून के बिहार में प्रवेश करने में अभी लगभग 15 से 20 दिनों का समय है. 16 मई को अंडमान में प्रवेश करने के साथ बिहार में इसकी झलक दिखी. 29 मई को केरल व 30 को भारत के दक्षिण पश्चिम में प्रवेश करेगा. लेन इससे पूर्व प्री मानसून लगातार अपना रूतबा दिखा रही है. कभी भी आसमान काले हो जा रहे हैं. तेज हवा व आंधी के साथ बारिश होने लग जा रही है. आले गिरने लग जाते हैं. इसी कभी-कभार की बारिश से शहर के गली-मुहल्लों की सड़कों पर पानी जमा हो जाता है.
नाले उफनाने लगते हैं और लोगों को बीते सितंबर महीने की कहानी डराने लगती है. इधर रह-रह कर हुई बारिश ने शहर के नया बाजार, न्यू कॉलोनी, गांधी पथ, कोसी चौक, रहमान चौक, चाणक्यपुरी, सहरसा बस्ती सहित अन्य लगभग सभी इलाके में निशानी छोड़ दी है. सड़कों पर जलजमाव को देख लोग अभी से ही सहमने लगे हैं. निचले इलाके के घरों में रहने वालों को अभी से घर में पानी घुसने की चिंता सताने लगी है.
पिछले साल दो महीने तक मॉनसून ने मची थी तबाही
बीते वर्ष सितंबर महीने में शहर में जलप्रलय आया था. लगातार बारिश होने और जलनिकासी की कहीं कोई व्यवस्था नहीं होने से चारों ओर हाहाकार मच गया था. डीएम द्वारा सरकार को त्राहिमाम संदेश भेजा गया था. जिस पर त्वरित संज्ञान लेते सीएम ने सचिव रैंक के दो आइएस अधिकारियों को जायजा लेने भेजा था. स्थल निरीक्षण के बाद उन्होंने भी स्थिति को विकट बताते हर मुहल्ले में दोगुने पंप सेट व 25 एचपी के दो हेवी पंप मंगा शीघ्र पानी निकालने का निर्देश दिया था.
स्वयं सीएम ने भी हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति को देखा था. शहर के मुहल्लों में नालों के नहीं रहने और जहां हैं उनकी सफाई नहीं होने से भी पानी को बहाव का रास्ता नहीं मिलता है. शहर में दो महीने तक जलजमाव की स्थिति बनी रही थी. हालांकि बस स्टैंड से पूरब वाले मुहल्ले में दिसंबर तक पानी वैसे ही जमा पड़ा था.
कई मुख्य सड़कों के महीनों डूबे रहने से वह पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी. जिसे नौ महीने बाद आज तक नहीं बनाया जा सका है. पूर्णत: जर्जर हुए सड़कों में गंगजला-पंचवटी, गंगजला-बस स्टैंड- प्रशांत मोड़, प्रशांत सिनेमा-मीरा टॉकीज-रहमान चौक, नया बाजार-सराही आदि शामिल हैं.
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