स्वीकृति के 12 वर्ष बाद भी अधूरी है योजना

सहरसा : फॉरबिसगंज ट्रैक हो या निर्मली-भपटियाही रेलवे ट्रैक जिले के सभी हिस्सों में रेलवे के मामले में लंबे समय से सरकार की उपेक्षा ही सामने आयी है. इसी का फलाफल है कि योजना स्वीकृति के 12 वर्ष बाद भी ट्रैक बिछाने का कार्य अधूरा है. ब्रॉड गेज सेवा तो दूर मीटर गेज सेवा भी […]
सहरसा : फॉरबिसगंज ट्रैक हो या निर्मली-भपटियाही रेलवे ट्रैक जिले के सभी हिस्सों में रेलवे के मामले में लंबे समय से सरकार की उपेक्षा ही सामने आयी है. इसी का फलाफल है कि योजना स्वीकृति के 12 वर्ष बाद भी ट्रैक बिछाने का कार्य अधूरा है. ब्रॉड गेज सेवा तो दूर मीटर गेज सेवा भी अब लोगों की पहुंच से दूर हो चुकी है. क्योंकि आमान परिवर्तन का कार्य चल रहा है. हालांकि रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 जनवरी 2012 यानि करीब पांच वर्ष पूर्व ही सहरसा-फॉरबिसगंज रेल लाइन का प्रथम फेज में राघोपुर-फॉरबिसगंज ट्रैक आमान परिवर्तन के लिए मेगा ब्लॉक किया गया था,
लेकिन जितनी तेजी से सपने परवान चढ़ रहे थे, उसके विपरीत मंथर गति से चल रहे कार्य ने सपनों पर पानी फेर दिया है. गौरतलब है कि तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2004 में सहरसा-फॉरबिसगंज के बीच आमान परिवर्तन कार्य की आधारशिला रखी थी. तब कहा गया था कि करीब 355 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किया जायेगा. रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति के बाद इसे पूरक बजट में शामिल किया गया था. कहा गया था कि सीमा सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने के कारण इस ट्रैक पर प्राथमिकता से काम होगा.
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