हत्याकांड. अल्पसंख्यक कल्याण शाखा में प्रधान लिपिक के पद पर थे शंकर झा

Published at :05 Dec 2016 6:10 AM (IST)
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हत्याकांड.  अल्पसंख्यक कल्याण शाखा में प्रधान लिपिक के पद पर थे शंकर झा

लोग शौच करने शाहपुर बाध की तरफ गये तो पुल के नीचे एक व्यक्ति का शव देखा. लोगों ने घटना की जानकारी बिहरा व सदर थाना को दी. सत्तरकटैया : प्रखंड के सदर थाना क्षेत्र स्थित पशु बाढ़ आश्रय स्थल शाहपुर के पास रविवार को अहले सुबह एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से क्षेत्र […]

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लोग शौच करने शाहपुर बाध की तरफ गये तो पुल के नीचे एक व्यक्ति का शव देखा. लोगों ने घटना की जानकारी बिहरा व सदर थाना को दी.

सत्तरकटैया : प्रखंड के सदर थाना क्षेत्र स्थित पशु बाढ़ आश्रय स्थल शाहपुर के पास रविवार को अहले सुबह एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है. मृतक की पहचान कहरा निवासी शंकर झा 65 वर्ष के रूप में की गयी है. जानकारी के अनुसार कुछ लोग शौच करने जब शाहपुर बाध की तरफ गये तो पुल के नीचे एक व्यक्ति का शव देखा. लोगों ने घटना की जानकारी बिहरा व सदर थाना को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकाला तो गला सहित शरीर के विभिन्न अंगों पर चाकू से गोदा हुआ था. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराने सदर अस्पताल भेजा. जहां शव की शिनाख्त हुई.
पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया चाकू से गला रेत कर मारने का मामला लग रहा है. मृतक सुपौल समाहरणालय के अल्पसंख्यक कल्याण शाखा के प्रधान लिपिक थे. शनिवार को कार्यालय से वापस घर लौट रहे थे. शाम होते ही किसी ने हत्या कर शव को पुल के नीचे छिपा दिया. घटना की जानकारी क्षेत्र में आग की तरह फैल गयी. और देखने वालों की भीड़ जमा हो गयी.
इस घटना से क्षेत्र में एक बार फ़िर दहशत का माहौल बन गया है. लोगों का कहना है कि शंकर की हत्या इसी जगह हुई कि कहीं और मार कर यहां फेंका गया है. इस घटना को अंजाम देने वाले की गिरफ्तारी व घटना के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. इस मामले में पूछने पर बिहरा थानाध्यक्ष सरवर आलम ने बताया कि घटना स्थल सदर थाना क्षेत्र में पड़ता है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
रविवार को ही नई बहू का होना था द्विरागमन : कहरा प्रतिनिधि के अनुसार प्रखंड के कहरा गांव निवासी स्वर्गीय जयभद्र झा के 55 वर्षीय पुत्र शंकर झा की अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर देने की घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया. परिवार मे पत्नी सहित अन्य सदस्य बेसुध हो गए. उनकी पत्नी मीरा देवी रो-रोकर अचेत हो जा रही है. खबर सुनते ही गांव सहित अन्य सगे संबंधी मृतक के घर पहुंच घटना को हृदय विदारक बताते अच्छे आदमियों के लिए भी अपराधियों में मानवता नहीं रहने की बात कही.
मालूम हो शंकर झा गांव व समाज में अपने मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे एवं कभी किसी से किसी तरह की भेदभाव रहने की शिकायत भी नहीं मिली थी. वे सुपौल समाहरणालय में प्रधान लिपिक के पद पर कार्यरत थे. उनके छोटे पुत्र पंकज झा की शादी दो वर्ष पूर्व बगभा पंचायत में हुई थी, जिसका द्विरागमन चार दिसंबर को होना निश्चित हुआ था.
सके कारण पुत्र पंकज भी छुट्टी लेकर घर आया था एवं अपनी पत्नी को लाने ससुराल गया था. तीन दिसंबर की शाम सुपौल से घर कहरा आने के क्रम में ही उन्हें अपराधियों ने निशाना बनाया. जानकारी पाकर पंचायत ग्रामीण सहित मुखिया पति समाजसेवी अमरेंद्र झा शंकर झा के घर पहुंच हत्या के कारण की जांच सुपौल एवं सहरसा के वरीय अधिकारियों एवं स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा कराने की मांग की. ताकि इस घटना मे संलिप्त लोगों को सामने लाया जा सके.
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