216 फीट के कांवर में दिखेंगे देशभर के प्रसिद्ध मंदिर, मटेश्वर धाम में इस बार होगा भव्य जलाभिषेक
विशाल कांवर के निर्माण में जुटे कारीगर | Prabhat Khabar Network
इस बार सिमरी बख्तियारपुर के बाबा मटेश्वर धाम में भाद्र मास के दूसरे रविवार को होने वाला जलाभिषेक अनोखा होगा. 216 फीट लंबे विशाल कांवर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों की प्रतिकृतियां तैयार की जा रही हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे. 3 सितंबर से शुरू होने वाली कावंर यात्रा में इस अद्भुत कलाकृति का प्रदर्शन किया जाएगा.
Baba Matreshwar Nath: सिमरी बख्तियारपुर के प्रसिद्ध बाबा मटेश्वर धाम में इस बार भाद्र मास के दूसरे रविवार को होने वाला जलाभिषेक कई मायनों में खास होने जा रहा है. श्रद्धालुओं की आस्था के साथ इस धार्मिक आयोजन में देश की प्रसिद्ध मंदिर स्थापत्य कला की झलक भी देखने को मिलेगी.
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इसके लिए 216 फीट लंबे विशाल कांवर का नए सिरे से निर्माण शुरू हो गया है. इस बार कांवर को पहले की तुलना में और भव्य तथा आकर्षक स्वरूप देने की तैयारी है. कांवर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों की प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी. सुल्तानगंज से पहुंचे करीब आधा दर्जन कुशल कारीगर दिन-रात इस विशाल कांवर को आकार देने में जुटे हैं.
एक कांवर में दिखेगी देशभर की धार्मिक विरासत
डाक एवं कांवरिया संघ, मटेश्वर धाम के सदस्यों के अनुसार, इस बार 216 फीट के कांवर में विशेष कलाकारी की जा रही है. कांवर को केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देने वाले स्वरूप में तैयार किया जा रहा है.
इसमें जगन्नाथपुरी, कोणार्क सूर्य मंदिर, विष्णुपद मंदिर गया, महावीर मंदिर पटना, बाबा बैद्यनाथ धाम, वैष्णो देवी मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर और बाबा मटेश्वर धाम समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की आकर्षक प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी.
निर्माण पूरा होने के बाद 216 फीट लंबा कांवर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र होगा. कांवर के साथ चलने वाली धार्मिक यात्रा में इसकी भव्यता लोगों को अपनी ओर खींचेगी.
तीन सितंबर से शुरू होगी कांवर यात्रा
बाबा मटेश्वरनाथ के जलाभिषेक की तैयारी के तहत कांवरिया तीन सितंबर को राजघाट, मुंगेर के लिए रवाना होंगे. अगले दिन चार सितंबर को पूजा-अर्चना के बाद गंगाजल भरा जाएगा और 216 फीट के विशाल कांवर के साथ पदयात्रा शुरू होगी.
कांवरिया गंगाजल लेकर बाबा मटेश्वर धाम की ओर बढ़ेंगे. यह यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरेगी.
खगड़िया से मानसी तक रहेगा पड़ाव
यात्रा के दौरान कांवरिया खगड़िया पहुंचेंगे, जहां करीब दो घंटे विश्राम किया जाएगा. इसके बाद यात्रा मानसी की ओर आगे बढ़ेगी.
मानसी में रात्रि विश्राम की व्यवस्था रहेगी. यहां श्रद्धालुओं के लिए भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा. धार्मिक यात्रा के साथ सांस्कृतिक आयोजन इसे और खास बनाएगा.
अगले दिन पांच सितंबर को कांवरिया फिर बाबा मटेश्वर धाम की ओर रवाना होंगे. रास्ते में मां कात्यायनी स्थान पहुंचकर पूजा-अर्चना और विश्राम किया जाएगा. इसके बाद कांवरिया सिमरी बख्तियारपुर हाई स्कूल मैदान पहुंचेंगे.
यहां रात्रि विश्राम के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा.
छह सितंबर को बाबा मटेश्वरनाथ का जलाभिषेक
यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव छह सितंबर को होगा. सुबह पूजा-अर्चना के बाद कांवरिया सिमरी बख्तियारपुर से बाबा मटेश्वर धाम के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे.
इसके बाद श्रद्धालु बाबा मटेश्वर धाम पहुंचकर भाद्र मास के दूसरे रविवार को पवित्र गंगाजल से बाबा मटेश्वरनाथ के अद्भुत शिवलिंग का जलाभिषेक करेंगे.
धार्मिक मान्यता और वर्षों से चली आ रही परंपरा के कारण इस आयोजन को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से आने वाले कांवरियों में भी उत्साह बना हुआ है.
शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम, बढ़ेगा आयोजन का आकर्षण
जलाभिषेक के बाद शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. धार्मिक अनुष्ठान के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा.
डाक एवं कांवरिया संघ के सदस्य आयोजन को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हैं. यात्रा के मार्ग, पड़ाव और कार्यक्रमों को लेकर भी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं.
Baba Matreshwar Nath: कारीगर दिन-रात तैयार कर रहे हैं विशाल कांवर
216 फीट के कांवर का निर्माण इस आयोजन की सबसे बड़ी तैयारियों में शामिल है. सुल्तानगंज से पहुंचे करीब आधा दर्जन कुशल कारीगर लगातार काम कर रहे हैं.
कांवर की लंबाई और उस पर बनने वाली मंदिरों की प्रतिकृतियों के कारण निर्माण अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. अलग-अलग हिस्सों में सजावट और कलाकारी के बाद इसे भव्य स्वरूप दिया जाएगा.
आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार तैयार होने वाला विशाल कांवर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि बाबा मटेश्वर धाम की धार्मिक पहचान को भी और मजबूत करेगा.
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लेखक के बारे में
By दीपांकर श्रीवास्तव
दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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