हाकिम व बाबुओं की अनदेखी के चलते किसान परेशान
Updated at : 29 Mar 2019 7:46 AM (IST)
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परबत्ता : राजकीय नलकूप से खेतों की प्यास नहीं बुझ रही है. सरकार सिंचाई पर भारी राशि खर्च करती है, लेकिन हाकिमों के कारण किसान परेशानी में हैं. किसान अपने स्तर से नलकूप का मरम्मत करवाते हैं. लगान भी समय से चुकाते हैं. प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई के लिए 46 सरकारी नलकूप है. आधे से […]
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परबत्ता : राजकीय नलकूप से खेतों की प्यास नहीं बुझ रही है. सरकार सिंचाई पर भारी राशि खर्च करती है, लेकिन हाकिमों के कारण किसान परेशानी में हैं. किसान अपने स्तर से नलकूप का मरम्मत करवाते हैं.
लगान भी समय से चुकाते हैं. प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई के लिए 46 सरकारी नलकूप है. आधे से अधिक नलकूप वर्षो से बंद है. हांलाकि अधिकारी दावा करते हैं कि करीब तीन दर्जन नलकूपों से किसानों का पटवन हो रहा है. जबकी यह दावा धरातल पर कुछ और हीं हकीकत बयां कर रहा है.
चंदा कर राशि देते हैं किसान : किसानों की मानें तो जो भी नलकूप फिलहाल चल रहे हैं वो आसपास के किसान अपने देखरेख मे चलाते हैं. नलकूप में खराबी होने पर विभाग का कर्मी देखने तक नहीं आते.
किसान आपस में चंदा जमाकर नलकूप ठीक कराते हैं. इसके बाद अधिकारी किसानों पर जबरन दबाव डालकर सरकारी आदेशों का हवाला देकर चार्ज वसूल करने से बाज नहीं आते हैं.
अगुवानी के डुमरिया गांव में हुआ खुलासा : ताजा मामला अगुवानी पंचायत के डुमरिया का है. जहां बोरिंग में खराबी आने के बाद किसानों ने स्थानीय ओपरेटर सहित विभागीय जेई को मरम्मती करने का गुहार लगायी.
नलकूप कई माह तक बंद रहने के बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया. परेशान किसानों ने आपस में हजारों रुपये चंदा कर बोरिंग को पटवन के लायक बनाया.
इसके बाद नलकूप विभाग द्वारा बोरिंग का लाईन काट किसानों से पहले बोरिंग चार्ज देने को कहा. वहीं किसान राकेश सिंह,अशोक यादव,राजेश यादव,सर्वेश यादव ने बताया की रबी सीजन का कुल 3200 रुपया स्थानीय ओपरेटर मो युनूस को दे दिये. 1800 देने की बात कहकर बोरिंग का लाईन काट दिया गया है.
सरकारी नलकूप का कोई फायदा नहीं
किसानों का कहना है की जब रबबी का चार्ज दे दिये तो क्यों हमलोगों का क्यों पटवन बंद कर दिया है.
किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसान आक्रोशित हैं. नलकूपों के नकारा साबित होने से क्षेत्र के किसान निजी पंप चालकों से ऊंची कीमत अदाकर पानी खरीदने को विवश हैं.
आश्चर्य तो यह है कि प्रखंड में दर्जन भर नलकूपों को सरकार द्वारा आवंटित लाखों की राशि खर्च कर पटवन के लायक बनाया गया है.लेकिन सभी मे ताले लगे है.
विभागीय जानकारी के अनुसार इन सभी नलकूप के रखरखाव का जिम्मा स्थानीय पंचायत के मुखिया जी को सौंपना है.लेकिन अबतक विभाग के जेई को इसकी फुरसत नहीं है.चालू कराने की दिशा में लघु सिंचाई विभाग उदासीन बना है.कुल मिलाकर क्षेत्र में सरकारी सिंचाई व्यवस्था किसानों के लिए छलावा साबित हो रहा है.
पूरा पैसा मिलने तक बोरिंग बंद रहेगा : जेई
इस मामले को लेकर नलकूप विभाग के जेई मो अकबर ने बताया की जबतक वहां के के ऑपरेटर द्वारा किसानों के पास चार्ज बकाया रहने की बात कही गयी है.जब तक पुरा पैसा नहीं देते तब तक बोरिंग बंद रहेगा.
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