उग्रतारा मंदिर से हटी स्टील ग्रिल, फिर शुरू होगी स्पर्श पूजा, श्रद्धालुओं ने ली राहत की सांस

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उग्रतारा मंदिर से हटा ग्रिल, श्रद्धालुओं में हर्ष

फोटो – हट गया ग्रिल | Prabhat Khabar Network

Ugratara Temple: सहरसा के मां उग्रतारा मंदिर में विग्रह के चारों ओर लगी ग्रिल को प्रशासन ने हटा दिया है। इस फैसले से स्थानीय श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है।

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Ugratara Temple: सहरसा जिले के प्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ मां उग्रतारा मंदिर में विग्रह के चारों ओर लगाई गई स्टील ग्रिल शुक्रवार रात हटा दी गई. जिलाधिकारी दीपेश कुमार के निर्देश पर मंदिर न्यास प्रबंधन ने यह कार्रवाई की. इसके साथ ही पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद समाप्त हो गया. ग्रिल हटने के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने राहत जताते हुए प्रशासन के फैसले का स्वागत किया.

स्टील ग्रिल लगाने के बाद शुरू हुआ था विवाद

कुछ दिन पहले मंदिर न्यास प्रबंधन ने बिना व्यापक सहमति के मां उग्रतारा के विग्रह के चारों ओर स्टील ग्रिल लगा दी थी. इसके बाद श्रद्धालुओं की स्पर्श पूजा पर पूरी तरह रोक लग गई थी. इस निर्णय का स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने विरोध किया. उनका कहना था कि यह उनकी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ा विषय है.

ग्रामीणों की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन

विवाद बढ़ने के बाद ग्रामीणों ने मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी दीपेश कुमार और स्थानीय विधायक संजय सिंह को लिखित शिकायत सौंपी. शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के निर्देश दिए.

जिला कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की पदाधिकारी स्नेहा झा तथा विधायक संजय सिंह मंदिर पहुंचे. उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली और श्रद्धालुओं से भी बातचीत की. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मंदिर न्यास के सचिव को तलब कर तत्काल ग्रिल हटाने का निर्देश दिया.

Ugratara Temple: शुक्रवार रात हटाई गई ग्रिल

प्रशासन के निर्देश के बाद शुक्रवार रात मां उग्रतारा के विग्रह के चारों ओर लगाई गई स्टील ग्रिल हटा दी गई. ग्रिल हटने के साथ ही मंदिर परिसर में लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया.

श्रद्धालुओं ने जताया आभार

ग्रिल हटने के बाद मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के त्वरित हस्तक्षेप की सराहना की. लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में मंदिर से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की राय अवश्य ली जाएगी, ताकि धार्मिक परंपराओं और आस्था का सम्मान बना रहे.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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