एक दशक बाद बाहर से लौटे, तो नहीं पहचान पायेंगे अपना स्टेशन
Author Prabhat khabar digital desk
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सासाराम : शहर के जो लोग एक दशक से बाहर रह रहे हैं,अगर हाल के दिनों में ट्रेन से लौटे तो सासाराम स्टेशन को पहचान नहीं पायेंगे. कभी दो लाइन, तीन प्लेटफाॅर्म, पतला फुट ब्रिज और गंदगी से पटा हुआ अस्त-व्यस्त व्यवस्था इस स्टेशन का पहचान हुआ करता था. अब इसका स्वरूप पूरी तरह बदल […]
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सासाराम : शहर के जो लोग एक दशक से बाहर रह रहे हैं,अगर हाल के दिनों में ट्रेन से लौटे तो सासाराम स्टेशन को पहचान नहीं पायेंगे. कभी दो लाइन, तीन प्लेटफाॅर्म, पतला फुट ब्रिज और गंदगी से पटा हुआ अस्त-व्यस्त व्यवस्था इस स्टेशन का पहचान हुआ करता था. अब इसका स्वरूप पूरी तरह बदल गया है. गया-डीडीयू रेलखंड पर सासाराम स्टेशन सबसे खूबसूरत स्टेशन दिख रहा है.
पिछले एक दशक से रेलवे की विभिन्न विंगो का करीब सौ करोड़ की योजनाओं का काम चल रहा है. कई योजनाएं पूरी हो चुकी है और बाकी योजनाओं का काम अंतिम चरण में है. संभवत: अगले माह उन योजनाओं का उद्घाटन होगा. यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ायी जा रही है. अभी कई योजनाएं स्वीकृत है और उन योजनाओं का काम बरसात बाद शुरू होने की उम्मीद है.
चांद में दाग की तरह दिखता है स्टेशन के मुख्य रास्ते पर अतिक्रमण : रेलवे के अधिकारियों की अनदेखी से स्टेशन का मुख्य रास्ता अतिक्रमण की चपेट में है. रास्ते पर ही फुटपाथी दुकानदार काबिज हैं. वहीं दूसरे लेन में ऑटो चालकों का कब्जा है.
पैदल आने जाने में भी यात्रियों को परेशानी होती है. यात्रियों की शिकायत के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं. जब किसी अधिकारी का विजिट होना होता है, उस समय रास्ते से अतिक्रमण को हटा दिया जाता है. सूत्र बताते है कि आरपीएफ के लोग फुटपाथियों से प्रतिदिन एक दुकान से 40 रुपये वसूलते हैं. रेल महकमा इस स्टेशन के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन स्थानीय अधिकारी व्यवस्था को अपडेट करने में लापरवाही दिखा रहे हैं
बढ़ायी गयीं यात्रियों के लिए सुविधाएं
सासाराम से आरा रेल लाइन का जुड़ना इस स्टेशन के विकास का टर्निंग प्वाइंट बना. आरा लाइन के लिए स्टेशन पर चार अतिरिक्त प्लेटफाॅर्म का निर्माण कराया गया. आने जाने के लिए तीन सौ मीटर लंबा और बीस फुट चौड़ा फुटब्रिज का निर्माण हुआ. सभी प्लेटफाॅर्मों पर शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की गयी.
प्लेटफाॅर्म की लंबाई को बढ़ा कर पांच सौ मीटर कर दिया गया. नये फुटब्रिज से सटे स्वचालित सीढ़ी का निर्माण होगा. पुराने फुटब्रिज को तोड़ा जा रहा है, उसके जगह चौड़ा फुटब्रिज का निर्माण होगा और स्काई रैंप बना कर नये फुटब्रिज से जोड़ने की योजना है. यात्री बिना परेशानी के एक फुट ब्रिज से होते हुए किसी प्लेटफाॅर्म पर आ-जा सकेंगे.
इस रेलखंड पर सबसे ज्यादा राजस्व देता है सासाराम
गया-डीडीयू रेलखंड पर सासाराम सबसे ज्यादा राजस्व देनेवाला स्टेशन है. जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस स्टेशन पर टिकट कलेक्शन से 24.18 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ था और गुडस लाइन से करीब तीन करोड़ राजस्व मिला, जो इस रेलखंड के अन्य स्टेशनों से बहुत ज्यादा है. इस रेलखंड के ग्रैंड कोड लाइन पर 41 मेल व एक्सप्रेस और छह जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं. आरा-सासाराम रेल लाइन शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. दूसरी बात आरा लाइन के जुड़ जाने से स्टेशन पर प्लेटफाॅर्म की संख्या को बढ़ाया गया.
कहते हैं अधिकारी
स्टेशन परिसर में विकास की कई योजनाएं पूरी हो गयी है और कई योजनाएं अंतिम चरण में है. रेलवे परिसर में रेल डीएसपी का कार्यालय, रेल थाना के निर्माण के लिए बिहार सरकार को एक एकड़ जमीन उपलब्ध करा दिया गया है और निर्माण कार्य भी शुरू है. स्टेशन के मुख्य रास्ते पर जो अतिक्रमण दिख रहा है उसको हटा कर उनके लिए स्थायी व्यवस्था करने कि योजना है.
उमेश पांडेय, स्टेशन प्रबंधक सासाराम
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