रौजा रोड के फुटपाथियों ने हटायीं अपनी दुकानें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Jun 2018 5:32 AM (IST)
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खाली जमीन पर निर्माण को लेकर आशंकित हैं दुकानदार, सीओ पर टिकी नजर सासाराम कार्यालय : अनुमंडल पदाधिकारी व अंचलाधिकारी की बातों का असर हुआ कि बुधवार की सुबह दस बजते-बजते रौजा रोड में दुकानदारों ने अपनी झोंपड़ी व दुकानें हटा ली. दुकानों के हटने और पहले से तोड़ी गई बाउंड्री के कारण सदर अस्पताल […]
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खाली जमीन पर निर्माण को लेकर आशंकित हैं दुकानदार, सीओ पर टिकी नजर
सासाराम कार्यालय : अनुमंडल पदाधिकारी व अंचलाधिकारी की बातों का असर हुआ कि बुधवार की सुबह दस बजते-बजते रौजा रोड में दुकानदारों ने अपनी झोंपड़ी व दुकानें हटा ली. दुकानों के हटने और पहले से तोड़ी गई बाउंड्री के कारण सदर अस्पताल बेपर्द हो गया. सदर अस्पताल में दाखिल होने के लिए अब हर जगह रास्ता बन गया है. इससे मरीजों व डॉक्टरों में सुरक्षा की चिंता सताने लगी है. गौरतलब है कि पिछले करीब एक सप्ताह से रौजा रोड में सदर अस्पताल व सड़क के बीच के जमीन को लेकर प्रशासन व दुकानदारों के बीच खिंचतान चल रहा था. कई बार की कोशिशों के बाद आखिर मंगलवार की शाम हुई वार्ता में प्रशासन को सफलता मिली और बिना किसी बल प्रयोग के दुकानें हट गईं.
प्रशासन ने दी थी चेतावनी
रौजा रोड में सदर अस्पताल व सड़क के बीच के निजी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर बार-बार प्रशासन की ओर से दबाव बनाया जा रहा था. हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में प्रशासन निजी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कवायद कर रहा था. इसी बीच मंगलवार की शाम एसडीओ राजेश कुमार गुप्ता ने दुकानदारों को बुधवार को दस बजे दिन तक दुकान हटाने की अंतिम चेतावनी दी थी. उसका असर हुआ और बिना किसी टकराहट के जमीन पर अतिक्रमण हट गया.
सदर अस्पताल की खोजी जा रही जमीन
जब बाउंड्री टूट गयी, तो सदर अस्पताल प्रशासन अपनी जमीन खोजने निकला है. नगर पर्षद में सदर अस्पताल के जमीन की खोज हो रही है. नगर पर्षद की रिपोर्ट के आधार पर एक बार फिर जमीन की मापी होगी. जबकि, इससे पहले भी कई बार जमीन की मापी हो चुकी है. तभी तो सदर अस्पताल के टीबी वार्ड के कुछ अंश को तोड़ने का आदेश निर्गत हुआ है. सवाल उठता है कि आज से पहले सदर अस्पताल प्रशासन क्या कर रहा था? उसने अपनी बाउंड्री बचाने के लिए पहले कवायद क्यों नहीं की? इसके पीछे किसी षड्यंत्र से इन्कार नहीं किया जा सकता है. क्योंकि, जमीन का मुकदमा करीब 40 वर्षों से चल रहा था, जिसमें एक पक्ष सदर अस्पताल व नगर पर्षद भी थी. कहीं न कहीं गोलमाल है. जवाबदेहों ने कही चूक की है या फिर सेट हो गये? यह कहना मुश्किल है. खैर देखते हैं आगे क्या होता है?
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