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83 साल से गहिलस्थान गांव में बलि प्रदान के बदले मां काली की केवल पूजा-अर्चना

Updated at : 12 Oct 2025 5:04 PM (IST)
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83 साल से गहिलस्थान गांव में बलि प्रदान के बदले मां काली की केवल पूजा-अर्चना

दिवराधनी पंचायत के गहिल स्थान गांव में मां काली पूजा

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अरविन्द कुमार जायसवाल,बीकोठी. प्रखंड के दिवराधनी पंचायत के गहिल स्थान गांव में मां काली पूजा की शुरुआत 83 पूर्व हुई थी. तब से लेकर अबतक मां काली पूजा धूमधाम से की जा रही है. गहिल स्थान गांव की मां काली स्थान में बली प्रदान नहीं होता है. इस वर्ष भी पूजा की तैयारी जोरों पर है. मंदिर परिसर में कलाकार प्रतिमा तैयार करने मे लगे हुए हैं. मंदिर के बाहर भी रंग रोगन और तैयारियां जोरों पर है.पूजा समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार मंडल ने बताया कि यहां पूजा की शुरुआत पहले फूस के घर और उसके बाद टीना घर में की गयी. धीरे धीरे इस पूजन का स्वरूप वृहत होता गया हैं. सन 1942 में गहिल स्थान निवासी धनी राम रॉय द्वारा ही इस गहिल स्थान गांव में मां काली का पूजा शुरू हुई थी तब से लेकर अबतक मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है.अध्यक्ष अशोक कुमार मंडल बताते है कि पूजा में युवाओं की अच्छी खासी भागीदारी रहती है. प्रारंभ से ही यहां पूजा पंडित कुमोद झा के वंशज ही कराते हैं. पूजा के दौरान विशेष आकर्षण का केन्द्र दीपावली में ही लगने लगता है. यहां वृहत पैमाने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होता है. मेला मालिक सह पूजा समिति अध्यक्ष अशोक कुमार मंडल सहित किशोर कुमार उर्फ मंटू,अनिल मंडल,मंगल मंडल,जनार्दन मंडल ने बताया कि मां के मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही यह मंदिर अपने भव्य भवन के कारण माता काली का प्रखंड क्षेत्र का चर्चित मंदिर बन गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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