95 वर्षों से आस्था का केंद्र है रजीगंज दुर्गा मंदिर, नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

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पूर्णिया पूर्व के रजीगंज स्थित ऐतिहासिक मां दुर्गा मंदिर.

पूर्णिया के रजीगंज स्थित मां दुर्गा मंदिर 95 वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. वर्ष 1931 में स्थापित यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का संगम रहा है. जानिए इसकी अनूठी परंपराओं के बारे में.

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पूर्णिया पूर्व से राजकुमार चौधरी की रिपोर्ट.

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पूर्णिया : पूर्णिया पूर्व प्रखंड के रजीगंज स्थित मां दुर्गा मंदिर पिछले करीब 95 वर्षों से क्षेत्रवासियों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. वर्ष 1931 में स्थापित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को भक्तों की विशेष भीड़ रहती है.

प्रमुख जानकारी

  1. वर्ष 1931 में स्थापित हुआ था रजीगंज दुर्गा मंदिर.
  2. करीब 95 वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है मंदिर.
  3. नवरात्र की सप्तमी पर निकलती है भव्य कलश यात्रा.
  4. विजयादशमी पर बिहार और नेपाल से पहुंचते हैं श्रद्धालु.
  5. धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों का भी रहा है केंद्र.

1931 में हुई थी मंदिर की स्थापना

स्थानीय लोगों के अनुसार रजीगंज दुर्गा मंदिर की स्थापना वर्ष 1931 में हुई थी. करीब एक वर्ष पहले यहां पाषाण की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा भव्य धार्मिक अनुष्ठान के साथ संपन्न कराई गई. इसके बाद मंदिर की धार्मिक गतिविधियों में और अधिक विस्तार हुआ है.

कभी पूरे इलाके का प्रमुख दुर्गा पूजा स्थल था मंदिर

अशोक मंडल, विश्वनाथ चौधरी, कृष्णानंद गुप्ता, सतनारायण मंडल एवं ज्योतिष चंद्र शाह ने बताया कि पुराने समय में पूर्णिया सिटी और रजीगंज क्षेत्र में मां दुर्गा की प्रतिमा केवल इसी मंदिर में स्थापित की जाती थी. यही वजह थी कि आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना और मनोकामना लेकर पहुंचते थे. आज भी नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

सप्तमी की कलश यात्रा है प्रमुख आकर्षण

नवरात्र की सप्तमी को मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. पहले महाअष्टमी और महानवमी पर पशु बलि की परंपरा थी, लेकिन समय के साथ यह प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है.

विजयादशमी पर लगता है महाभोग

विजयादशमी के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल महाभोग का आयोजन किया जाता है. इसमें बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल से भी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं.

धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक पहचान भी रहा है मंदिर

करीब 15 वर्ष पहले तक मंदिर परिसर में गांव के युवाओं द्वारा रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक कथाओं पर आधारित पारंपरिक नाटकों का मंचन किया जाता था. इन आयोजनों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते थे और यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था.

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