500 साल पुराने मंदिर में विराजते हैं चार मुखी शिवलिंग; पूरण देवी परिसर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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मंदिर | Prabhat Khabar Network

बिहार के पूर्णिया में स्थित पूरण देवी मंदिर एक अद्भुत आध्यात्मिक केंद्र है, जहां 500 साल पुराना चार मुखी शिवलिंग विराजता है. माना जाता है कि यहां सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.

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सीमांचल के ऐतिहासिक शहर पूर्णिया में आस्था और अध्यात्म का एक अनोखा केंद्र है, जहां बिहार के विरले मंदिरों में शामिल चार मुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है. पूर्णिया जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर 'पूर्णिया सिटी' स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक माता पूरण देवी मंदिर परिसर में बने इस अति प्राचीन शिवालय के प्रति श्रद्धालुओं की असीम आस्था है. सावन के महीने, महाशिवरात्रि और शिव चतुर्दशी पर यहां सुबह से देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहता है.

500 साल पुराना इतिहास और चार मुखी शिवलिंग की महिमा

पूरण देवी मंदिर परिसर में स्थित यह शिवालय पूर्णिया जिले के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है:

  • एकमात्र चार मुखी शिवलिंग: माना जाता है कि पूरे जिले में यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान भोलेनाथ के चार मुखी शिवलिंग के दर्शन होते हैं.
  • मनोकामना पूर्ण करने वाला धाम: स्थानीय मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
  • आध्यात्मिक वातावरण: मंदिर परिसर चारों ओर से हरियाली और प्राकृतिक शांति से घिरा हुआ है, जो यहां आने वाले भक्तों को अद्भुत मानसिक सुकून और आत्मिक शांति का अहसास कराता है.

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही बिहार सरकार

इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की महत्ता को देखते हुए बिहार सरकार द्वारा इसके सर्वांगीण एवं पर्यटन विकास के लिए नई पहल शुरू की गई है:

  • विकास योजनाएं शुरू: मंदिर परिसर को सुसज्जित और दर्शनीय बनाने के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है.
  • पर्यटन का नया केंद्र: आने वाले समय में यह परिसर सीमांचल के एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल (Religious Tourism Destination) के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा.

सावन और शिवरात्रि में लगता है भव्य मेला

सावन की हर सोमवारी और महाशिवरात्रि पर बेलौरी और आसपास के इलाकों का नजारा देखते ही बनता है:

  • हर-हर महादेव के जयकारे: तड़के से ही दूर-दूर से पहुंचने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के "बोल बम""हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठता है.
  • भजन-कीर्तन का दौर: दिनभर जलाभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहता है, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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