पूर्णिया के लाइन बाजार का वह काली मंदिर, जहां अस्पताल की दवा के साथ मरीज जलाते हैं उम्मीदों के दीये
लाइन बाजार काली मंदिर
Line Bazar Kali Mandir: पूर्णिया के मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार में बड़े-बड़े अस्पतालों के बीच स्थित 90 साल पुराने मां काली मंदिर की महिमा निराली है. यहाँ भर्ती गंभीर मरीज डॉक्टरों की दवा के साथ-साथ माता के दरबार में दुआ की अर्जी लगाना नहीं भूलते.
मुख्य बातें:
पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट
Line Bazar Kali Mandir: बिहार के पूर्णिया शहर का लाइन बाजार इलाका वैसे तो पूरे सीमांचल में बड़े-बड़े निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्लीनिकों के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी ‘मेडिकल हब’ के बीचोबीच असीम आस्था और अटूट विश्वास का एक ऐसा केंद्र भी है, जिसे लोग ‘उम्मीदों का मंदिर’ कहते हैं. यहाँ आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज और उनके परिजन भी मत्था टेकने पहुंचते हैं. अस्पतालों में डॉक्टरों से इलाज और कड़वी दवाएं लेने के बाद, वे शीघ्र स्वस्थ होने के लिए माता के दरबार में आकर अपनी उम्मीदों के दीये जलाते हैं.
“महज थेरेपी से नहीं, दुआ से भी ठीक होती है बीमारी”
- दवा के साथ दुआ का संगम: मंदिर में आने वाले मरीजों के परिजनों का स्पष्ट तर्क है कि गंभीर और जानलेवा बीमारियां केवल मेडिकल थेरेपी या दवाओं से पूरी तरह ठीक नहीं हो सकतीं. विज्ञान के प्रयास के साथ ईश्वरीय दुआ का होना बेहद जरूरी है और माता के दर पर आते ही उन्हें मानसिक शांति व चमत्कारिक राहत मिलती है.
- सच्चे मन की मुराद: इस पुराने मंदिर के बारे में यह लोक मान्यता गहरी है कि यहाँ जो भी कोई सच्चे मन से और नम आंखों से अपनी बीमारी से मुक्ति की प्रार्थना करता है, माता रानी उसकी करुण पुकार अवश्य सुनती हैं. यही कारण है कि दिन हो या रात, यहाँ मरीजों और उनके तीमारदारों का आना-जाना लगा रहता है.
1936 से अटूट है विश्वास, जानिए इस मंदिर का गौरवशाली इतिहास
| ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलू | विवरण व मुख्य तथ्य |
| स्थापना वर्ष | यह ऐतिहासिक मंदिर वर्ष 1936 से स्थापित है (लगभग 90 वर्ष पुराना इतिहास). |
| संस्थापक की जानकारी | इतिहास के पन्नों में यह स्पष्ट नहीं है कि इसकी स्थापना किनके द्वारा की गई थी. |
| प्रतिमा का स्वरूप | मंदिर में माता की कोई स्थायी पाषाण प्रतिमा नहीं है, फिर भी भक्तों की आस्था अटूट है. |
| दैनिक अनुष्ठान | भक्तों का मानना है कि माता यहाँ साक्षात विराजती हैं, इसलिए सुबह-शाम भव्य आरती और दीपदान होता है. |
Line Bazar Kali Mandir: दीपावली पर भव्य पूजनोत्सव और पिछले दो वर्षों से निकल रही ऐतिहासिक रथ यात्रा
दीपावली के पावन अवसर पर यहाँ वार्षिक पूजनोत्सव का बेहद भव्य और बड़े पैमाने पर आयोजन किया जाता है. मंदिर कमेटी के अध्यक्ष गुड्डू अग्रवाल, कमल घोष, वी. चक्रवर्ती और रंजीत घोष सहित सभी सक्रिय सदस्य इस पूरे अनुष्ठान की कमान संभालते हैं. विशेष बात यह है कि आध्यात्मिक चेतना को जगाने के लिए पिछले दो सालों से काली पूजा के पावन मौके पर यहाँ से एक विशाल और आकर्षक ‘रथ यात्रा’ भी निकाली जा रही है, जिसमें शामिल होने के लिए पूरे पूर्णिया शहर से हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं.
चिकित्सकों के इस गढ़ में मां काली का यह दरबार इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जहां आकर विज्ञान की सीमाएं खत्म होने लगती हैं, वहां से अध्यात्म और अटूट विश्वास की एक नई किरण फूटी है, जो निराश मरीजों के जीवन में नई रोशनी भर रही है.
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लेखक के बारे में
By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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