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जनजातीय योजना को ले पपीता की खेती को बढ़ावा देने पर बल

Updated at : 14 Oct 2025 6:50 PM (IST)
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जनजातीय योजना को ले पपीता की खेती को बढ़ावा देने पर बल

जलालगढ़

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जलालगढ़. कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ परिसर में एकदिवसीय प्रशिक्षण सह प्रत्यक्षण कार्यक्रम का आयोजन जनजातीय योजना के अंतर्गत किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय की महिलाओं को जीवकोपार्जन एवं आमदनी अर्जित करना है. मौके पर केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ के एम सिंह ने पपीता की उन्नत खेती की जानकारी दी. बताया कि पपीता स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है. पपीता की खेती से आदिवासी समुदाय की महिलाएं आमदनी अर्जित कर सकती है. एक एकड़ क्षेत्र में करीब 1500 से 2000 पौधे लगाए जाते हैं और प्रत्येक पौधे से करीब एक से डेढ़ क्विंटल फल प्राप्त होता है . बाजार में यह काफी ऊंचे दर पर बिकता है. केंद्र के वैज्ञानिक डॉ राबिया प्रवीण ने महिलाओं को पपीता की खेती के लिए अधिक उपज वाली प्रभेदों के बारे में जानकारी दी. पपीता के मुख्य प्रभेदों में रेड लेडी, पूसा ड्वार्फ, पूसा डिलीशियस, पूसा जॉइंट की खेती की जाती है. जिसे ऊंची और मध्यम जमीन में आसानी से खेती कर अच्छी फसल की जा सकती है. सितंबर और अक्टूबर का माह पपीता की पौधों को लगाने का उपयुक्त समय होता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ संतोष कुमार ने पपीता की खेती के लिए मृदा प्रबंधन की जानकारी दी. अनामिका ने पपीता में लगने वाले कीट एवं रोगों की चर्चा की . कृषि वैज्ञानिक डॉ आतिश सागर ने पपीता की प्रोसेसिंग एवं उनसे बनने वाले विभिन्न उत्पाद की पैकेजिंग के बारे में चर्चा की.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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