बालश्रम निषेध दिवस आज: पूर्णिया में बीते 11 वर्षों में 450 से अधिक बाल मजदूर कराये गये मुक्त

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 12 Jun 2026 10:47 AM

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संयुक्त श्रम भवन पूर्णिया

Anti Child Labor Day: आज पूरा विश्व बालश्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) मना रहा है. इस मौके पर पूर्णिया जिले से राहत और सजगता बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जहां श्रम विभाग की मुस्तैदी से पिछले 11 सालों में 450 से ज्यादा मासूमों को होटलों, गैरेज और ढाबों के दलदल से रेस्क्यू कर मुख्यधारा में वापस लाया गया है.

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पूर्णिया से सत्येन्द्र सिन्हा गोपी की रिपोर्ट

Anti Child Labor Day: आधुनिकता और विकास की बुलंदियों को छूते समाज के बीच बालश्रम (Child Labour) आज भी मानवता के माथे पर एक गहरा कलंक बना हुआ है. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में रंग-बिरंगी किताबें और स्कूल का बस्ता होना चाहिए, उस उम्र में वे अपनी मजबूरियों या चंद पैसों के लालची नियोजकों के कारण हाड़-तोड़ मजदूरी करने को विवश हैं. इस सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ पूर्णिया जिला श्रम विभाग का ‘धावादल’ (रेस्क्यू टीम) बेहद आक्रामक और सक्रिय भूमिका में नजर आ रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 11 वर्षों के दौरान जिले के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 450 से अधिक नाबालिग बच्चों को विमुक्त कराकर उन्हें शिक्षा और पुनर्वास जैसी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है.

आंकड़ों का आईना: पिछले 5 वर्षों में रेस्क्यू का ग्राफ

श्रम विभाग की मुस्तैदी के कारण हर साल चलाए जाने वाले विशेष जांच अभियानों के तहत छुड़ाए गए बच्चों का सिलसिलेवार आधिकारिक आंकड़ा निम्नलिखित है:

वित्तीय वर्ष (Financial Year)विमुक्त (रेस्क्यू) किए गए बच्चों की संख्या
वर्ष 2021 – 2207 बच्चे
वर्ष 2022 – 2323 बच्चे
वर्ष 2023 – 2455 बच्चे
वर्ष 2024 – 2543 बच्चे
वर्ष 2025 – 2650 बच्चे

गैरेज, ढाबा और राशन दुकानों में पिस रहा है बचपन; कानून तोड़ने वालों पर दर्ज हुआ केस

पूर्णिया के शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण प्रखंडों की मंडियों तक में बालश्रम का जाल फैला हुआ है. कड़े कानूनों के बावजूद कई कड़ियां ऐसी हैं जहां नियमों का खुला उल्लंघन देखा जाता है:

  • हॉटस्पॉट: आज भी मोटर बाइक रिपेयरिंग गैरेज, चाय-नाश्ते के होटल, राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर स्थित ढाबे, किराना दुकानें, हाट-मेले और शादी-पार्टियों के कैटरिंग जैसे उत्सवों में मासूम बच्चे जूठन साफ करते और बर्तन मांजते आसानी से दिख जाते हैं.
  • विभागीय हंटर: श्रम अधीक्षक ने बताया कि केवल बच्चों को मुक्त कराना ही विभाग का मकसद नहीं है. बालश्रम कानून का उल्लंघन करने वाले क्रूर नियोजकों (मालिकों) के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है. कई दुकानदारों पर भारी आर्थिक पेनाल्टी (जुर्माना) लगाने के साथ-साथ उनके विरुद्ध न्यायालय में सर्टिफिकेट केस भी दर्ज कराया गया है.

सभी प्रखंडों में मुस्तैद है ‘धावादल’; पुनर्वास योजनाओं का मिल रहा है लाभ

कानून की कड़ाई: बालश्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का व्यावसायिक कार्य कराना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है.

श्रम विभाग के अनुसार, जिले के सभी प्रखंडों में धावादल के सदस्यों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है. गुप्त सूचना मिलते ही यह टीम अचानक छापेमारी करती है. विमुक्त कराए गए बच्चों को केवल उनके घर नहीं छोड़ा जाता, बल्कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से उन्हें मुख्यमंत्री बाल श्रम पुनर्वास योजना के तहत वित्तीय सहायता, मुफ्त स्कूली शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय या अन्य आवासीय छात्रावासों में दाखिला दिलाया जाता है, ताकि वे दोबारा मजदूरी के दलदल में न धकेले जा सकें. अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास किसी भी दुकान या कारखाने में छोटा बच्चा काम करता दिखे, तो इसकी सूचना तुरंत चाइल्डलाइन या श्रम विभाग को दें.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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