आंध्र प्रदेश से लौटे मजदूरों की त्रासदी और गहरी, GMCH में भर्ती दो की हालत नाजुक
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 04 Jun 2026 1:52 PM
मो. राजीक और श्रवण कुमार
Andhra Pradesh: पूर्णिया कसबा के मजदूरों पर परदेस से आई आफत थमने का नाम नहीं ले रही है. आंध्र प्रदेश की पाउडर फैक्ट्री से बीमार होकर लौटे 6 मजदूरों में से दो की हालत बीती रात अचानक बेहद नाजुक हो गई, जिसके बाद जीएमसीएच (GMCH) प्रशासन ने उन्हें त्वरित उच्च स्तरीय इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया है.
पूर्णिया से विकास वर्मा की रिपोर्ट
Andhra Pradesh: पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड अंतर्गत जियनगंज और आस-पास के गांवों से आंध्र प्रदेश कमाने गए प्रवासी मजदूरों की मौत और उनके गंभीर रूप से बीमार होने का सिलसिला लगातार गहराता जा रहा है. ताजा घटनाक्रम में, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया के विशेष वार्ड में भर्ती कराए गए 6 पीड़ित मजदूरों में से दो की शारीरिक स्थिति बीती रात अचानक और बिगड़ गई. डॉक्टरों की टीम द्वारा काफी यांत्रिक और चिकित्सीय प्रयासों के बाद भी जब सुधार नहीं दिखा, तो अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति को देखते हुए दोनों को बेहतर इलाज के लिए ‘हायर सेंटर’ (Higher Center) रेफर कर दिया. मालूम हो कि इस जहरीली धूल जनित बीमारी के कारण अब तक 5 स्थानीय मजदूरों की दर्दनाक मौत पहले ही हो चुकी है, जिससे पूरे सीमांचल क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है.
मो. राजीक और श्रवण कुमार की हालत गंभीर; 4 अन्य विशेष वार्ड में भर्ती
- हायर सेंटर भेजे गए मरीज: अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जिन दो मजदूरों की फेफड़ों और सांस लेने की तकलीफ अत्यधिक बढ़ गई थी, उनमें मो. राजीक और श्रवण कुमार शामिल हैं. इन्हें एम्बुलेंस के जरिए त्वरित उच्च स्तरीय चिकित्सा सहायता के लिए भेजा गया है.
- जीएमसीएच में उपचाराधीन मजदूर: शेष 4 बीमार मजदूरों का इलाज फिलहाल जीएमसीएच के विशेष वार्ड में डॉक्टरों की कोर टीम की देखरेख में चल रहा है. इनमें विक्रम कुमार, सीतेश कुमार, गंगोली कुमार और उपिन ऋषि शामिल हैं, जिनकी स्थिति फिलहाल स्थिर लेकिन चिंताजनक बनी हुई है.
5 मौतों के बाद अलर्ट मोड पर प्रशासन; डॉक्टरों की टीम रख रही है पल-पल की नजर
ट्रॉमा सेंटर से आधिकारिक बयान: इस आपातकालीन स्वास्थ्य संकट को लेकर स्थानीय जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. जीएमसीएच के ट्रॉमा सेंटर में इन मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर राजशेखर ने बताया कि रेफर किए गए दोनों मरीजों को वेंटिलेटर और त्वरित उच्च स्तरीय पल्मोनरी चिकित्सा सहायता की अत्यंत आवश्यकता थी, जिसके कारण उन्हें हायर सेंटर भेजा गया है. अस्पताल में भर्ती शेष अन्य चारों मजदूरों के वाइटल्स और ऑक्सीजन लेवल पर मेडिकल टीम द्वारा पल-पल की नजर रखी जा रही है.
आंध्र प्रदेश की उस पाउडर फैक्ट्री में पत्थर की धूल के कारण फेफड़े सिकुड़ने (सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी की आशंका) के इस खौफनाक मामले के सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम प्रभावित गांवों में कैंप कर रही है. परदेस से लौटे अन्य मजदूरों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस सिंडिकेट के जरिए और कितने युवक वहां बंधक जैसी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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